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बीकानेर,जग प्रसिद्ध श्रीपार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम कृष्णगिरि तमिलनाडु के पीठाधीश्वर, परम् पूज्यपाद जगद्गुरु 1008 आचार्यश्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में ग्यारह दिवसीय चैत्र नवरात्रि पर्व महोत्सव एवं श्री महालक्ष्मी महायज्ञ सहित जीवनोत्थान करने वाले विविध प्रसंगों विशेष के साथ श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण की यहां गंगाशहर मार्ग स्थित अग्रवाल भवन परिसर में पूर्णाहुति हर्षोल्लास से जय जय गुरुदेव के जैकारों से सम्पन्न हुई। इससे पहले बीकानेर के इतिहास में पहली बार भक्ति और सनातन शक्ति के व्यापक एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जगद्गुरु के अनेक चमत्कारिक प्रसंगों ने हजारों लोगों के जीवन को नई दिशा प्रदान कर आध्यात्म एवं दैवीय कृपामय प्रार्थना ऊर्जा का डंका बजाया। यही नहीं, विशाल आध्यात्मिक पताका फहराने वाले इस भव्य कीर्तिमानी कार्यक्रम में हवन पूजन, जाप, अनुष्ठान के ग्यारह दिनों में हुए करोड़ों मंत्रों से अभिमंत्रित पवित्र जल कलश से जगद्गुरु का अतिदिव्य महाभिषेक वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया गया। शक्तिपीठाधिपति, आध्यात्म योगीराज, जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज ने इस दौरान मातृशक्ति एवं मां की भक्ति की संगीतमय व्याख्या की। साथ ही अपने सिद्ध साधक संत से पूर्व के जीवन घटनाक्रमों के प्रसंग का बेहद ही सरलता से भावपूर्ण प्रधानता के साथ विस्तार से उल्लेख किया। जीवन की ऊर्जा के निर्धारण पर प्रकाश डालते हुए पूज्य गुरुदेवश्रीजी बोले, संतों के चरणों में रहने पर ईश्वरीय ऊर्जा व तरंगों के साथ निश्चित रूप से शुभ प्रगति प्रदायक भाव प्राप्त होते हैं। अच्छी संगत की तरंगे जीवन को श्रेष्ठता की ओर परिवर्तित कर इस जन्म ही नहीं अगले जन्म के लिए भी निश्चित ही कल्याणकारी साबित होती है, जो कि तिर्यंचो के लिए भी संभव नहीं है। शास्त्रों एवं अनुभवी संतों की बातें कभी गलत नहीं हो सकती। प्रसंगवश मय उदाहरण के उन्होंने यह भी कहा कि संतों के समक्ष अज्ञानतावश किया गया तर्क बुद्धि को नष्ट–भ्रष्ट करता है। संत और शास्त्र के समक्ष कभी तर्क नहीं करने की अभिनव सीख देते हुए मंत्र शिरोमणि, जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि भक्ति रुपी हथोड़ा व श्रद्धा रुपी भाव व्यक्ति में होना महत्ती आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संसार का परिणाम कुछ भी हो सकता है, मगर ईश्वर अथवा गुरु भक्ति का परिणाम सदैव शुभ ही होगा। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने गलत किए हुए का सच्चाई से पछतावा कर लेता है तो उसके दुख पाप मिट जाते हैं। इस मौके पर संतश्रीजी ने कहा कि मनुष्य के कई रुप हैं वह अपने विकार दुनिया से छुपाता है।

 

गुरुभक्तों, कार्यकर्ताओं का सत्कार, सेवा शिरोमणि, सेवा चक्रवर्ती इत्यादि पदवियों के साथ सम्मान

 

दौराने कार्यक्रम पूर्णाहुति से पहले पूज्यपाद जगद्गुरु श्रीजी ने आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों में विविध रुपों में सेवाएं प्रदान करने वाले समस्त गुरुभक्तों, कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद स्वरुप नगद राशि, उपहार व प्रसाद, माल्यार्पण, शाल्यार्पण कर सत्कार कर सेवा शिरोमणि, सेवा चक्रवर्ती इत्यादि पदवियों के साथ सम्मान किया। साधना के शिखर पुरुष पूज्यपाद जगद्गुरु श्रीजी ने कृष्णगिरी वाली राजराजेश्वरी देवी पद्मावती मां के चरणों की शक्ति की भक्ति करने अर्थात् मंदिर के आगामी जून माह में 26 से 28 तारीख तक वार्षिकोत्सव ध्वजा की जानकारी देते हुए सभी को भावभरा कृष्णगिरी आगमन का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि नागलोक की पट्टरानी मां पद्मावतीजी पर सच्चा विश्वास, श्रद्धा, भक्ति चमत्कारिक रुप से सुख, आरोग्य एवं समृद्धि प्रदायक सिद्ध होगी। भक्ति की शक्ति के रुप में बीकानेर सहित महाराष्ट्र, एमपी, उड़ीसा, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, सहित अनेक प्रदेशों के लोगों के रोग मुक्ति, ऋण मुक्ति व कार्य सिद्धी के चमत्कारिक अनुभवों के प्रसंगों का उल्लेख भी स्वयं बड़ी संख्या में सैकड़ों भक्तों ने उत्साह से जय जय गुरुदेव के जैकारे लगाते हुए किया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जगद्गुरु श्रीजी वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज के अधिकृत वेरीफाइड यूट्यूब चैनल थॉट योगा से लाइव प्रसारित किया गया।

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