
बीकानेर, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में सुनियोजित कृषि तकनीक विषय पर शुक्रवार को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति डॉ अरुण कुमार ने किसानों को आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर खेती करते हुए मुनाफा अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यदि खेती को योजनाबद्ध तरीके से किया जाएगा तो न केवल संसाधनों का सदुपयोग हो सकेगा बल्कि खेती लाभदायक साबित होगी तथा किसान समृद्ध बनेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों का कृषि की नवीनतम तकनीकों से परिचय करवाते हुए इन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है।
प्रशिक्षित किसान विश्वविद्यालय के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में खेती से जुड़े ज्ञान को दूसरों के साथ साझा करें। किसान अपनी सफलता, अनुभव विश्वविद्यालय के साथ भी साझा करें जिससे अन्य किसानों को भी इन तकनीकों का लाभ मिल सके। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम लाभ जमीनी स्तर पर किसानों को मिल सके। उन्होंने बताया कि 28 मार्च को विश्विद्यालय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से संसाधनों का संतुलित उपयोग करने का आह्वान किया।
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ प्रदीप पगारिया ने कहा कि खेती मुनाफा देने वाली बने, इसके लिए सुनियोजित खेती में लागत को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मृदा, खाद, बीज उर्वरक बाजारीकरण सहित विभिन्न बिंदुओं पर ट्रेनिंग दी जाती है। उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हमें प्राकृतिक कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ाने तथा द्वितीयक कृषि पर ध्यान केंद्रित करना होगा ।
प्रशिक्षण के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों में हाइड्रोपोनिक्स, राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी, बीज उत्पादन तकनीक, लो टनल तकनीक, ड्रिप इरिगेशन आदि की जानकारी दी गई। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ पी के यादव ने प्रशिक्षण की रुपरेखा की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण में 9 गांवों के 25 किसान शामिल हुए। अनुसंधान निदेशक डॉ विजय प्रकाश ने कहा कि पानी, खाद जैसे आदानों का सदुपयोग हो सके इसके लिए सुनियोजित कृषि खेती आज की आवश्यकता है। इंजीनियर जे के गौड़ ने प्रशिक्षण के तकनीकी पक्षों पर विस्तार से जानकारी दी।
मानव संसाधन विकास निदेशालय निदेशक डॉ दीपाली धवन ने आभार व्यक्त किया। किसानों ने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर डॉ आई पी सिंह, डॉ विमला डुकवाल, डॉ राजेन्द्र सिंह राठौड़ , डॉ दाताराम, डॉ नीना सरीन, डॉ वीर सिंह, डॉ राजेश कुमार वर्मा, डॉ एच एल देशवाल सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिष्ठाता व किसान उपस्थित रहे.।