










बीकानेर,प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा आज प्रातः नत्थूसर गेट बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में देश के ख्यातनाम साहित्यकार रंगकर्मी, चिंतक एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय समारोह ‘सृजन-सौरम हमारे बाऊजी’ का आगाज़ किया गया।
संस्थान के प्रतिनिधि वरिष्ठ शिक्षाविद् राजेश रंगा ने बताया कि समारोह के प्रथम दिन लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में 100 से अधिक बालक-बालिकाओं को विशेष रूप से रंगा का बाल-साहित्य एवं उनकी अगली दो पीढ़ियों द्वारा सृजित व अन्य साहित्यकारों की विभिन्न विधाओं की बाल-साहित्य की पुस्तकों को नई पीढ़ी को निःशुल्क अर्पित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि ख्यातनाम साहित्यकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में नई पीढ़ी को बाल-साहित्य अर्पण करना एक साहित्यिक अवदान व नवाचार है। बालक-बालिकाओं के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ आयोजक संस्था द्वारा गत तीन वर्षांे से सैंकड़ों बालक/बालिकाओं को बाल-साहित्य का निःशुल्क वितरण करना अपने आप में महत्वपूर्ण तो है ही, साथ ही प्रेरणादायक भी है।
शर्मा ने आगे कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा बहुप्रतिभावान एवं बहुविधाविद् देश की ऐसी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूति थी, जिन्होने साहित्य, रंगकर्म, शिक्षा, नृत्य, संपादन, अनुवाद आदि विभिन्न कलानुशासनों में राष्ट्रीय स्तर के कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जिससे हमें सदैव प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने अपने पिताश्री के जीवन के कुछ अनछुए साहित्यिक प्रसंग सबके साथ साझा कर उनकी स्मृतियों को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
प्रारंभ में युवा संस्कृतिकर्मी आशीष रंगा ने सभी का स्वागत करते हुए तीन दिवसीय समारोह के बारे मंे विस्तृत जानकारी सभी के साथ साझा की।
इस अवसर पर महावीर स्वामी, सीमा पालीवाल, सीमा स्वामी, मनमोहन सुथार, उपेन्द्र जोशी, राजेश्वरी व्यास, प्रीति राजपूत, हेमलता व्यास, सुमन खुड़िया, प्रतीक आचार्य, मीनाक्षी, मुकेश देराश्री, अशोक शर्मा, नवनीत व्यास, तोलाराम सारण, अख्तर अली, कन्हैयालाल पंवार, चंपालाल गहलोत, भैरूरतन व घनश्याम ओझा सहित अनेक गणमान्यों ने कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा को नमन-स्मरण किया।
कार्यक्रम का संयोजन करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् हरिनारायण आचार्य ने रंगा के शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवदान को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम का सफल संचालन भी किया।
