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बीकोनर,भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा आज m सिरोही जिले के आबू-रोड़ स्थित ओर गांव में जन जातीय उप-योजना के तहत एक दिवसीय पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गतिविधि में क्षेत्र के 105 महिला व पुरुष पशुपालकों को लाभान्वित किया गया। शिविर के दौरान कुल 1030 पशुओं को स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया गया जिनमें 219 ऊँट, 548 भेड़-बकरी, 118 गाय और 145 भैंस शामिल थे। केंद्र के विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने पशुओं में होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान, उनके बचाव तथा उपचार के बारे में उपयोगी जानकारी प्रदान की। उन्होंने समय पर टीकाकरण, नियमित कृमिनाशक और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियां अपनाने पर विशेष जोर देते हुए बताया कि इन उपायों से पशुधन को स्वस्थ रखकर उसकी उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। शिविर के दौरान ऊँटों के रक्‍त व त्‍वचा के नमूने केन्‍द्र की प्रयोगशाला में जांच हेतु लिए गए हैं।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशीनाथ ने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ पशुओं की शारीरिक वृद्धि के लिए पर्याप्त संतुलित आहार, उचित देखरेख एवं नियमित स्वास्थ्य प्रबंधन को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि पशुपालन संबंधी इन पहलुओं पर जागरूकता से पशुपालक अपने पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। इस दौरान ऊँटों में सर्रा रोग के बचाव हेतु टीकाकरण भी किया गया।
केंद्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्‍यम से अपनी बात पहुंचाते हुए बताया कि भारत सरकार की ‘जन जातीय उप-योजना’ के तहत पशुपालकों को सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में महत्‍वपूर्ण सुधार लाया जा सके। उन्‍होंने पशुपालकों से केन्‍द्र द्वारा विकसित तकनीकी अपनाकर ऊँट दुग्ध आधारित उद्यमिता से जुड़ने का आह्वान किया।
टीएसपी योजना के नोडल अधिकारी मनजीत सिंह ने बताया कि इस अवसर पर पशुपालकों को ‘करभ’ पशु आहार, खनिज मिश्रण, कृमिनाशक दवाइयां, इनपुट (कृषि संबद्ध संसाधन), प्राथमिक उपचार किट आदि का वितरण किया गया।
एनआरसीसी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पशुपालन विभाग, सिरोही के पशु चिकित्‍सा अधिकारियों द्वारा भी महत्‍वपूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत की ओर से सरपंच/प्रशासक तथा सिरोही के प्रगतिशील पशुपालक सेवाराम ने एनआरसीसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोजित गतिविधियों से जनजातीय पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है और इससे उनके पशुपालन व्यवसाय को सशक्त बनाने में मदद मिल सकेगी। केंद्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल ने इस उप-योजना के उद्देश्यों, उसके महत्त्व एवं एन.आर.सी.सी. की विभिन्न प्रसार गतिविधियों पर प्रकाश डाला तथा वित्त एवं लेखा अधिकारी आशीष पित्ती ने टी.एस.पी. के अंतर्गत पशुपालकों के लिए निर्धारित प्रावधानों, अनुदान एवं सहायता प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।

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