











बीकानेर,भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर की विशेषज्ञ टीम ऊँटों में फैली अज्ञात बीमारी की जांच हेतु फलोदी जिले की ग्राम पंचायत जांबा के मोताई, जांबा की ढाणी एवं सिदा क्षेत्रों में पहुंची। केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन ने बताया कि ग्राम प्रधान एवं जागरूक किसानों से प्राप्त सूचना के अनुसार हाल ही में कई ऊँटों की अज्ञात बीमारी से मृत्यु हुई है, जिससे पशुपालकों में चिंता व्याप्त है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर बीमारी के कारणों की जांच प्रारंभ की है, ताकि पशुपालकों को इससे होने वाली पशु हानि एवं आर्थिक नुकसान को रोका जा सके।
वैज्ञानिक डॉ. सागर अशोक खुलापे ने बताया कि लगभग 50 ऊँटों के रक्त नमूने तथा श्वसन तंत्र के स्राव (रेस्पिरेटरी स्वैब्स) एकत्र कर एनआरसीसी प्रयोगशाला में विस्तृत परीक्षण हेतु रखे गए हैं, जिससे वायरस, बैक्टीरिया अथवा अन्य संभावित कारणों की सटीक पहचान कर प्रभावी समाधान खोजा किया जा सके।
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने बताया कि फील्ड में बीमार ऊँटों का लक्षणों के आधार पर तत्काल उपचार किया गया तथा पशुपालकों को रोग प्रबंधन एवं संक्रमित पशुओं की देखभाल संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिक टीम के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि एनआरसीसी उष्ट्र प्रजाति के संरक्षण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति पूर्णतः सक्रिय और प्रतिबद्ध है। किसी भी आपात स्थिति में केन्द्र की वैज्ञानिक टीम त्वरित कार्रवाई कर ऊँट पालकों को आवश्यक उपचार एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करती है, ताकि ऊँट पालकों की आजीविका सुरक्षित बनी रहे। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान एवं शिक्षक श्री गेम्पर राम बिश्नोई ने त्वरित कार्रवाई के लिए एनआरसीसी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान का पूर्व सहयोग भी अत्यंत सराहनीय रहा है। एनआरसीसी के श्री अमित ने भी टीम को सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
