











बीकानेर,राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के हेतु कृष्ण कुणाल शासन सचिव (शिक्षा) राजस्थान सरकार और सीताराम जाट निदेशक माध्यमिक शिक्षा से मिलकर त्वरित समाधान की मांग की।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता में शिक्षा के क्षेत्र में कई सुझाव व शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण का आग्रह किया है।
प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा ने बताया कि संगठन शिष्टमंडल ने राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर विज्ञान शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु कंप्यूटर अनुदेशक कैडर के सुदृढीकरण, पदनाम परिवर्तन एवं वेतन विसंगति का निवारण, ग्रीष्मावकाश के बकाया वेतन भुगतान हेतु एक समान आदेश जारी करने ,शिक्षा विभाग में नए जिलों के गठन के फलस्वरूप शिक्षकों एवं कार्मिकों की वरिष्ठता पदोन्नति में विकल्प प्रदान करने, एमएसीपी प्रकरणों के निस्तारण हेतु एसीआर की अनुपलब्धता की स्थिति में सेवा सन्तोषजनक प्रमाण पत्र/नियमित वेतनवृद्धि प्रमाण के आधार पर स्वीकृति जारी करवाने,सेवारत शिक्षकों को पत्राचार बीएड पाठ्यक्रम के अन्तर्गत इन्टर्नशिप अवधि के वेतन भुगतान करने,सत्र 2019-20 से 2022-23 तक क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों का आवंटन करवाने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि शासन सचिव से वार्ता में स्टाफिंग पैटर्न शीघ्र करने ,RTE के प्रावधानों में परिवर्तन करने,तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापकों के पद हेतु डी.पी.सी. नियमानुसार वरिष्ठता से कार्यव्यवस्थार्थ अस्थायी पदोन्नति कर पदस्थापन देने,महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालयों के संबंध में शीघ्र निर्णय लेने,शिक्षक संवर्ग के पदोन्नति हेतु संगठन ने कई सुझाव भी दिए।
इसी प्रकार विद्यालयों में CSG राशि उपलब्ध करवाने, एसआईआर से प्रभावित व्याख्याताओं के कार्यमुक्ति / कार्यग्रहण पर लगी रोक हटाकर शीघ्र आदेश जारी करने पर सहमति बनी।इस अवसर पर राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य,प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसन्त जिंदल, उपाध्यक्ष सुषमा विश्नोई, सभाध्यक्ष संपत सिंह ,प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह,महिला मंत्री गीता जैलिया सहित प्रदेश कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारीयों ने कहा कि शासन सचिव स्तर की वार्ता शिक्षकों के लिए नवीन सौगात लेकर आएगी और शिक्षकों के रुके हुए कार्यों के पूर्ण होने से शिक्षा जगत में नव ऊर्जा का संचार होगा।
