












बीकानेर,नाबार्ड सेवानिवृत कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा लंबे समय से लंबित अपनी न्यायपूर्ण मॉगों को लेकर भारत सरकार; वित्त मंत्रालय तक नाबार्ड उच्च प्रबंधन के माध्यम से अपनी बात पहॅुचानें के लिए पूरे आज भारत में नाबार्ड कार्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया गया। इसी अनुक्रम में राजस्थान ईकाई द्वारा भी नाबार्ड कार्यालय पर धरना करते हुए अपनी मॉगों को भारत सरकार तक पहॅुचानें के लिए उच्च प्रबंधन से चर्चा करते हुए सेवानिवृत के पश्चात की पेंशन संबंधित लंबित मॉगों को भारत सरकार के साथ निदान करने हेतु ज्ञापन दिया गया। राजस्थान प्रदेश सचिव श्री अलोक गीताई द्वारा सूचित किया गया कि 21 जुलाई 2023 भारत सरकार निर्देशन के माध्यम से नाबार्ड भर्ती पेंशनभोगियों को पेंशन संशोधन से वंचित कर दिया, जो कि पूर्णत अन्यायपूर्ण व अहितकारी है। यह सरकारी निर्देश हमारी पेंशन नियमावली 1993 का भी उल्लंघन है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत का भी उल्लंघन है। हमारा आंदोलन इस संशोधन को सेवानिवृत कर्मचारियों व अधिकारियों के हित के अनुकूल करने के लिए है। आज तक भारत सरकार के निर्देशन में भारतीय रिजर्व बैंक तथा नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण विकास के लिए कार्य करने के पश्चात सेवानिवृति के पश्चात भी लंबे समय से भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा नाबार्ड के पेशनधारियों की मॉगों पर अनुकूल विचार नहीं किया जा रहा है। जिसका प्रतिकूल प्रभाव सेवानिवृत परिवारों पर पड रहा है वर्तमान समय में फैमिली पेंशन ऊट के मॅुह में जीरे के समान है। इस स्थिति में नाबार्ड प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी है कि यह सुनिश्चित किया जावे कि सभी पेंशनभोगियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार किया जाए। पेंशन-संबंधी भुगतानों में भर्ती के स्रोत, पूर्व सेवाओं या किसी अन्य मापदंड के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव और विभाजन नहीं किया जावे, सिवाय उन आवश्यकताओं के जो पेंशन के लिए पात्र होने हेतु आवश्यक हैं’। भारत सरकार के माध्यम से प्रबंधन इस भेदभाव को दूर करने में असमर्थ रहा है। अत इस अवसर पर धरने मे शामिल सभी सदस्यों द्वारा एक सुर में अपनी बात रखते हुए बताया गया कि भारत सरकार तथा उच्च प्रबंधक का ध्यान इन लंबित मामलों को याद दिलाने के लिए कार्यालय में धरना प्रदर्शन ही एक मात्र रास्ता बचा है, अगर अब भी भारत सरकार द्वारा उनकी लंबित मॉगों पर विचार नहीं किया गया तो सभी सेवानिवृत सदस्यों को सडक पर उतरकर आंदोलन की राह पर जाना पडेगा।
