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बीकानेर,राज्य सरकार ने देर रात पुलिस अधिकारियों के तबादले किये है। जिसमें बीकानेर पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर का भी तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह बीकानेर के जाये जन्मे मृदुल कच्छावा को पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। वे एक दो दिन में नए पुलिस अधीक्षक का पदभार ग्रहण कर सकते है। उधर,बीकानेर मूल के देवेंद्र बिश्नोई का भी ट्रांसफर हो गया है।को एसपी से उन्हें जोधपुर में आरपीटीसी (पुलिस ट्रेनिंग सेंटर) में डीआईजी पोस्ट पर लगाया गया है।2015 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस मृदुल कच्छावा ने न केवल अपनी मेहनत से यूपीएससी क्रैक किया,बल्कि विभिन्न जिलों में पोस्टिंग के दौरान अपराध पर कड़ा प्रहार किया। चंबल के बीहड़ों में डकैतों को सरेंडर करवाने से लेकर अब नागौर में ऑपरेशन नीलकंठ के जरिए नशा तस्करों को हवाई जहाज बनाने तक उनकी कहानी प्रेरणा और साहस की मिसाल है। आईपीएस मृदुल कच्छावा को राजस्थान में सिंघम के नाम से जाना जाता है। अपने साहसिक कार्यों और निडर रवैये के लिए मशहूर मृदुल कच्छावा ने अपराधियों के बीच ऐसा खौफ पैदा किया है कि उनके नाम से ही वे थर-थर कांपने लगते हैं। कच्छावा भरतपुर,झून्झुनू,नागौर,करौली,धौलपुर में एसपी रहे। वहीं भीलवाड़ा में प्रोबेशन में रहे। बाद में सूरतगढ़ व गंगागनगर में सीओ रहे। इसके अलावा अजमेर में एसीबी व जयपुर ग्रामीण में भी पुलिस अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके है।

बीकानेर में हुई शुरूआती शिक्षा
30 अगस्त 1989 को बीकानेर में जन्मे मृदुल कच्छावा की शुरुआती पढ़ाई बीकानेर में हुई। परिवार जयपुर शिफ्ट होने के बाद उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से 12वीं और कॉमर्स कॉलेज से बी.कॉम किया। राजस्थान यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल बिजनेस में मास्टर्स पूरा किया। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी की योग्यता भी हासिल की।मुंबई में जर्मन बैंक में अच्छी जॉब मिली,लेकिन सेना अधिकारी बनने का सपना था। एनडीए की तैयारी में दो बार असफल होने के बाद उन्होंने आईपीएस का रास्ता चुना। दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की। 2014 में इंडियन पोस्ट सर्विस मिली,लेकिन 2015 में आईपीएस में सफल हुए।कच्छावा ने 5 जुलाई 2019 से 8 जुलाई 2020 तक धौलपुर में एसपी के रूप में काम किया। कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन्होंने चंबल के बीहड़ों में ऑपरेशन चलाए।फूलन देवी,मलखान सिंह जैसे खूंखार डकैतों क ी पुरानी शरणस्थली वाले इलाके में उनकी टीम ने एक साल में 57 डकैतों और हार्डकोर अपराधियों को गिरफ्तार किया। कई बड़े डकैत जैसे पप्पू गुर्जर,लाल सिंह,रामविलास,भारत और रघुराज गुर्जर ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और सरेंडर कर दिया। उनकी सख्त रणनीति,गुप्त सूचनाओं का उपयोग और टीमवर्क से चंबल में डकैतों का खौफ खत्म हुआ।2018 में उनकी शादी वरिष्ठ आईपीएस पीके सिंह की बेटी कनिका सिंह से हुई। घुड़सवारी, बास्केटबॉल, डॉग्स पालना और वाइल्डलाइफ फ ोटोग्राफी उनके शौक हैं। घुड़सवारी से उन्हें अनुशासन और नेतृत्व मिलता है।

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