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बीकानेर,जयपुर,प्रदेश में आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार) के तहत चल रही प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं उजागर हो रही हैं। इसी के विरोध में शनिवार को संयुक्त अभिभावक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में अभिभावक शिक्षा संकुल पहुंचे और अपनी समस्याएं रखीं। संघ द्वारा आयोजित बैठक में उपस्थित अभिभावकों ने लिखित शिकायतों के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की।

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि लॉटरी में चयनित होने के बावजूद उनके बच्चों को स्कूलों द्वारा प्रवेश नहीं दिया जा रहा, दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है और कई मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के आवेदन निरस्त कर दिए जा रहे हैं।

*बैठक में सामने आई प्रमुख समस्याएं—*

1. लॉटरी में चयन के बावजूद बच्चों को प्रवेश से वंचित रखा गया।
2. दस्तावेज़ सत्यापन में अनावश्यक देरी कर अभिभावकों को बार-बार परेशान किया गया।
3. आरटीई पोर्टल पर स्टेटस अपडेट नहीं होने से भ्रम और मानसिक तनाव की स्थिति बनी।
4. प्रोविजनल अलॉटमेंट के बाद भी बिना सूचना आवेदन निरस्त किए गए।

संयुक्त अभिभावक संघ का कहना है कि यह स्थिति दर्शाती है कि निजी स्कूल खुलेआम आरटीई कानून की अवहेलना कर रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग पूरी तरह निष्क्रिय और असफल साबित हो रहा है।

*प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू का कड़ा बयान—* “आरटीई का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार देना है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह पूरी व्यवस्था मज़ाक बनकर रह गई है। निजी स्कूलों की मनमानी चरम पर है और शिक्षा विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देना सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है। यदि शीघ्र ही दोषी स्कूलों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा।”

*उन्होंने आगे कहा—* “अभिभावकों को बार-बार चक्कर लगवाना, पोर्टल पर सही जानकारी नहीं देना और बिना कारण आवेदन निरस्त करना न केवल लापरवाही है, बल्कि आरटीई को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश है।”

*प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल की मांगें—*
1. सभी लंबित मामलों में तत्काल दस्तावेज़ सत्यापन कर प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।
2. नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया अपनाई जाए।
3. आरटीई पोर्टल को पारदर्शी बनाते हुए रियल-टाइम स्टेटस अपडेट अनिवार्य किया जाए।
4. अभिभावकों की समस्याओं के समाधान हेतु जिला स्तर पर हेल्पडेस्क स्थापित किए जाएं।

संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन अभिभावकों के साथ मिलकर प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करेगा।

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