













बीकानेर,अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान उच्च शिक्षा की स्थानीय इकाई महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय द्वारा आज नवसंवत्सर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता स्वामी विमर्शानंद गिरि महाराज, अधिष्ठाता, शिवबाड़ी मठ, ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि अभी मधुमास है वसंत ऋतु है, बसंत का मतलब यह है कि हर पत्ता आपसे बात करना चाहता है हर पुष्प आपको सुवासित करता है, ऐसे उल्लास और आनंदमय वातावरण में, हम निरंतर चिंतन करते रहे,प्रत्येक भारतीय बिटिया, प्रत्येक भारतीय शेरनी की तीसरी आंख खुल जानी चाहिए। जब हम स्वयं इतने पवित्र होंगे, हम स्वयं इतने चरित्रवान होंगे, स्वयं इतने दृढ़ होंगे, स्वयं सत्य के पथ पर चलने वाले होंगे, स्वयं न्याय के पथ पर चलने वाले होंगे,स्वयं आलोक के पथ पर चलते हुए माता पिता की, टीचर्स की बात मानेंगे, तब यह तीसरा नेत्र खुल सकता है। यह हमारी विशेषता है कि हम उस परम तत्त्व से जुड़े हुए हैं जो काल से परे था, क्योंकि महाकाल की पूजा करते हैं हम काल की पूजा करें। हमारी पूजा से, हमारे संकल्प से जो संकल्प से कहते हैं, जहाँ पर ध्रुव संकल्प है, संकल्प ध्रुव, संकल्प दृढ़, संकल्प जैसे नचिकेता ने किया था, जैसे ध्रुव ने किया था और अंगद ने किया था, चिंतन करने की आवश्यकता है। हम भगवान राम को मानते हैं भगवान राम के मंदिर में जाते हैं अंगद कितने युवा बनके हमारी परंपरा को गौरवान्वित कर रहे हैं, यदि युवा यह कहे कि मैं अंगद हूँ, मैं नचिकेता हूँ, तो हम संवत्सर की बात कर रहे हैं तो हम अपने आप को 2 अरब वर्ष पूर्व लेके जा रहे हैं इसका मतलब हमको गर्व होना चाहिए। गर्व से कहो हम भारतीय हैं। गर्व से कहो कि आप भारतीय बिटिया हो। गर्व से कहो भारतीय बहन हो, जब सुबह उठने से लेकर रात्रि तक मेरी सारी दिनचर्या भारत से, भारतीयता से भरी हुई होगी, तभी कालक्रम के विकास को और नव संवत्सर के महत्व को समझ पाएंगे।
इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि के रूप में संगठन के सेवा आयाम के संयोजक प्रोफेसर शशिकांत ने विषय प्रवर्तन करते हुए संगठन की रीति नीति से अवगत करवाया तथा नवसंवत्सर की प्रासंगिकता
का उल्लेख किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत सद साहित्य भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर नवदीप सिंह बैंस द्वारा की गई। कार्यक्रम के अंत में विभाग सह संयोजक प्रोफेसर हेमेंद्र अरोड़ा द्वारा आगंतुक अतिथियों, शिक्षक साथियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन इकाई सचिव डॉ राधा सोलंकी द्वारा किया गया।
