












बीकानेर,अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित मासिक संवाद श्रृंखला के तहत ‘‘भाषा का शिक्षा में महत्त्व’’ विषय पर बोलते हुए डॉ. रूबिना कोचर, सहायक आचार्य, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज ने कहा कि भाषा से ही हम अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते है तथा भाषा हमारे सम्प्रेषण का सषक्त माध्यम है। हमें अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाएं भी सीखनी चाहिए। क्योंकि जब हम अपने परिवार एवं सामाजिक दायरे में होते है तो मातृभाषा की सहजता रहती है लेकिन अगर में देश से बाहर जाते है वहां हमें अपनी बात रखनी है तो हमें अन्य भाषा की आवश्यता महसूस होती है।
डॉ. कोचर ने कहा कि तकनीकी विकास निरन्तर हो रहा है, इसके ज्ञान हेतु हमें भाषा का ज्ञान होना आवश्यक हो गया है लेकिन हम अपनी मातृभाषा में जितनी सहजता महसूस करते है किसी अन्य भाषा में महसूस नहीं कर सकते। भाषा हमें मातृत्व प्रदान करती है, अपनत्व महसूस करवाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखे तब पता चलता है कि जब हम अपनी मातृभाषा में बात करते है तो मष्तिक के न्यूरॉन ज्यादा एक्टिव होते है। हमें भाषा के साथ-साथ नए शब्दों को भी ढूंढना चाहिए जिससे हमारे बोलने एवं समझने की शक्ति का विकास होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्ष्यता करते हुए प्राची रस्तोगी, सी.ए. ने कहा कि भाषा हमारे व्यक्तित्व को निखारती है तथा हमारे अन्दर आत्मविश्वास पैदा करती है। हमें सशक्त भाषा के लिए पुस्तकों से जुड़ना चाहिए जिससे हमे नए-नए शब्द पढ़ने को मिलते है तथा इससे हमारे बोलने एवं सम्प्रेषण का विकास होता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अनिता गर्ग, शिक्षाविद् एवं प्राचार्य चायनाण सी.सै. स्कूल ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में संलग्न होना भी आवष्यक है।
संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि भाषा के द्वारा ही मानव का विकास होना संभव हुआ है। साथ ही हम अपनी संवेदना एवं मानवीय कार्य भाषा की महत्ता से परिपूर्ण कर पाने में सक्षम हुए है।
कार्यक्रम में अमरदीप ओझा, कविता पुरोहित, नर्बदा थानवी, लक्ष्मी, पूजा, प्रिया सहित चायनाण सी. सै. स्कूल के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
