
बीकानेर,सिंचाई के पानी के लिए घड़साना आंदोलन नजीर है। 2005 में हुए आंदोलन जैसे हालात फिर बनने लगे हैं। श्रीगंगानगर में तो तीन दिन से किसान एकजुट हो रहे हैं लेकिन मंगलवार को लूणकरणसर में जुटे किसानों ने भी आंदोलन को हवा दे दी।
दरअसल इस साल फरवरी में सिंचाई का पानी बंद हो गया। घड़साना आंदोलन के समय तो अक्टूबर से ही तीन बारी के पानी को लेकर आंदोलन हुआ था। इस साल तो पूरी सिंचाई तीन बारी में हो गई। ऐसे में जिन किसानों ने गेहूं-जौ बोया वो फसलें फरवरी में ही सूखने लगीं। जैसलमेर में चने की फसल को ही सिंचाई लायक पानी नहीं मिला। अब तो सिंचाई पानी बंद होने से चने के साथ गेहूं और जौ का सूखना तय है। किसान आंदोलन की राह पकड़ने लगे हैं।
अभी अलग-अलग तहसीलों पर मामला गर्म हो रहा है लेकिन जैसे-जैसे फसलें सूखेंगी वैसे-वैसे किसानों का गुस्सा बढ़ने की आशंका है। पौंग डेम के हालात भी चिंताजनक हैं। डेम में पानी इतना बचा जिससे सिर्फ जून तक पीने की आपूर्ति ही हो सकती है। अगर डेम में से सिंचाई का पानी दिया तो पश्चिमी राजस्थान के करीब ढाई करोड़ लोग प्यास बुझाने को तरस जाएंगे। सरकार ऐसे में फंसती नजर आ रही है। घड़साना आंदोलन के वक्त बी.डी.कल्ला सरीखे नेता मंत्रिमंडल में थे।
बावजूद इसके आंदोलन उग्र हो गया था। इस सरकार में पश्चिमी राजस्थान में ऐसा कोई लीडर नहीं जो आंदोलन को नियंत्रित कर सके या रुख मोड़ सके। देवी सिंह भाटी जैसे जो लीडर हैं वो साइड लाइन हैं। ऐसे में अगर आंदोलन तेज हुआ तो सरकार को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।
मंगलवार को युवा लीडर राजेन्द्र मूंड की अगुवाई में एसडीएम को पानी को लेकर ज्ञापन दिया गया। हैरानी की बात ये कि इस ज्ञापन में लूणकरणसर से चुनाव लड़ चुके प्रभुदयाल सारस्वत भी साथ थे। ज्ञापन में महिपाल सारस्वत, अजय गोदारा, तोलाराम गोदारा, धर्मवीर गोदारा, रामप्रताप मेघवाल, गोकुल बिश्नोई समेत तमाम लोग शामिल थे।
10 से लूणकरणसर में महापड़ाव का ऐलान
पानी को लेकर मंगलवार को किसानों ने चेतावनी भरा ज्ञापन दिया है लेकिन मांग पूरी ना होने पर 10 फरवरी से महापड़ाव का एलान किया गया है। कांग्रेस नेता राजेन्द्र मूंड ने कहा कि अगर पानी नहीं था तो सरकार को फसल की बिजाई नहीं करानी थी। अब किसान ने बिजाई कर दी तो पानी मांगेगा। ये उसका हक है।
पानी नहीं तो कम से कम 6 घंटे लाइट ही दे देते जिससे वो कहीं से पानी की जुगाड़ कर फसल बचा लेते। सरकार तो किसानों को बर्बाद करने पर तुली है। पहले मूंगफली के लिए बारदाना नहीं दिया। फिर समय पर खाद नहीं और अब पानी बंद कर दिया। किसान अब दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उसके पास खोने को कुछ नहीं बचा। पानी नहीं मिला तो आंदोलन घड़साना की याद दिलाएगा।