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बीकानेर,जयपुर। अमायरा आत्महत्या प्रकरण में शिक्षा विभाग द्वारा की गई हालिया कार्रवाई को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ का आरोप है कि विभाग ने गंभीर मामले में ठोस और निष्पक्ष जांच करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाते हुए “कॉपी-पेस्ट” कार्रवाई की है।

*प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के अनुसार,* सीबीएसई के आदेश की नकल करते हुए नीरजा मोदी स्कूल की केवल कक्षा 11वीं एवं 12वीं पर प्रतिबंध लगाना इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ खिलवाड़ है। जबकि विभाग को प्रारंभिक स्तर से ही सख्त और व्यापक कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन शुरू से ही जांच प्रक्रिया संदेह के घेरे में रही है।

अभिषेक जैन बिट्टू का कहना है कि* यह कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि शिक्षा विभाग स्कूल प्रबंधन के दबाव में कार्य कर रहा है। यह न केवल जांच अधिकारियों का अपमान है, बल्कि प्रदेश के अभिभावकों के विश्वास के साथ भी बड़ा धोखा है।

संघ ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए घटना स्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट किया, जो कि अत्यंत गंभीर विषय है। इसके बावजूद विभाग द्वारा सख्त कार्रवाई नहीं करना कई सवाल खड़े करता है।

*संघ ने मांग की है कि* राजस्थान सरकार तुरंत प्रभाव से नीरजा मोदी स्कूल की एनओसी निरस्त करे और इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराए। साथ ही प्रदेशभर में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए ठोस नीति बनाई जाए।

संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्यायसंगत कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशभर में अभिभावकों के साथ व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश के 5 करोड़ अभिभावक शिक्षा विभाग के इस दोहरे रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।

 

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