











बीकानेर,गुरू जम्भेश्वर निर्वाण स्थल लालासर साथरी में फाल्गुन मेले के अवसर पर जम्भवाणी हरिकथा का शुभारंभ शुक्रवार से हुआ। यद्यपि यहाँ पर कथा गुरूवार से शुरू होना प्रस्तावित थी परंतु खेजड़ी आन्दोलन के चलते एक दिन देरी से कथा शुरू हुई।
लालासर साथरी के महंत डॉ स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने ज्योति प्रज्वलित कर कथा का वाचन किया। कथा में खेजड़ी के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा अपना माइनस प्वाइंट जानना ही सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है। अभिमान के कारण व्यक्ति यह समझ नहीं पाता और वह हमेशा दूसरों के माइनस प्वाइंट देखता रहता है।
कथा के दौरान कहा कि, जीवन के किसी भी क्षेत्र में तत्व की प्राप्ति बिना तपस्या के नहीं हो सकती। तपस्या के बाद मिली सफलता सुखी जीवन का वरदान होती है।
सबदवाणी के शब्दों की व्याख्या करते हुए आचार्य ने कहा कि, जाम्भोजी की वाणी में समग्र शास्त्रों का सार निहित है। गुरू जांभोजी को यदि किसी ने गाली भी दी तो उन्होंने गहना मानकर सहजता से उनके अज्ञान व अभिमान का निवारण किया ।
आचार्य शिवानंद ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी है। साधना से अनूभूत किया जा सकता है। ज्ञान के उजाले में भगवान के दर्शन होते है।
स्वामी केशवानंद आचार्य ने देशभर से आये श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
महाशिवरात्रि को रातभर भजन संध्या व जागरण होगा। 16 फ़रवरी को युवा सम्मेलन व प्रतिभा सम्मान समारोह होगा। जिसमें बिश्नोई समाज के सफल युवाओं के साथ प्रतिभाओं का संवाद भी होगा।
