











उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि शासनश्री साध्वी श्री ज्ञानवती जी आगमज्ञ तत्वज्ञ के साथ समयज्ञ थी। समय को देखकर चलने वालों की सर्वत्र शोभा होती है। उन्होंने दीर्घकालीन संयम जीवन को समता सहिष्णुता स्वाध्याय ध्यान से सफल बनाया। उनके भावों के निर्मलता और व्यवहार में निश्चछलता के कारण सबके साथ अपनत्व भाव देखने को मिला। गंगाशहर में उनके संयम काल का अधिक समय लोगों को मिला सब उनकी सरलता से प्रसन्न थे. सबको वे शिक्षा प्रदान करते रहते थे इसलिए आज उन्हें सब याद कर रहे हैं उन्होंने तीन आचार्यो का, तीन साध्वी प्रमुखाओं का शासन काल देखा सबसे उनको आदर भाव प्राप्त हुआ।आज स्मृति सभा में यह कामना करता हूँ कि वे उत्तरोत्तर विकास करती हुई चरम लक्ष्य को प्राप्त करें। सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी विशदप्रज्ञा जी साध्वी लब्धियशा जी आदि समस्त साध्वियों के साथ गंगाशहर के तेरापंथ सभा ने अपना अच्छा दायित्व निभाया।मुनि श्री ने बीकानेर में विराजित शासन श्री मंजुप्रभा जी एवं शासन श्री कुन्थुश्रीजी की तरफ से भी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुनि श्री श्रेयांस कुमार जी ने दोहों के माध्यम से अपनी भावनाऐं व्यक्त की।
सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी ने ज्ञानवती जी के गुणानुवाद सभा में अपने भाव रखते हुए कहा कि आत्मा की अनन्तकालीन यात्रा में संयम के 68 वर्ष महत्वपूर्ण होते है। शासन श्री साध्वी श्री ज्ञानवती ने तेरापंथ धर्म संघ में 68 वर्ष का संयम पर्याय का पालन किया। दिन – प्रतिदिन इनकी वृतियो में रूपांतरण देखकर सबको प्रसन्नता होती थी। उनके भीतर प्राणी मात्र के प्रति आत्मियता, वात्सल्य, करूणा का भाव था। उनकी आत्मा के ऊधर्वारोहण की कामना की।
साध्वी श्री लब्धियशा जी ने साध्वी श्री ज्ञानवती जी के बारे में बोलते हुए कहा कि जिंदगी एक राह गुजर है, राही आते हैं चले जाते हैं कोई वीरले राही होते हैं ,जो यादों में बस जाते हैं। शासन श्री ज्ञानवती का जीवन सबके लिए प्रेरणादायी था । यथा नाम तथा गुण। निकट आने वाले को बात-बात में ज्ञान की बात बता देना आपकी खूबी थी । आप समस्या के समाधान थे। आपके मुखारविंद से निकला हर शब्द सिद्ध हो जाता था। आपकी सहजता सरलता स्पष्टवादिता , साफ़ सुथरी जीवन शैली आने वाले हर व्यक्ति को प्रभावित करती थी। सेवा केंद्र शांतिनिकेतन में सेवाग्रही साध्वी के रूप में आपका सर्वप्रथम स्थान था। वात्सल्य और अपनेपन से सबके दिलों में माता का स्थान बनाया यह अपने आप में एक विरल है । साध्वी श्री ज्ञानवती जी साधना आराधना की जीती जागती ज्योत थी ।
साध्वी श्री जिनबाला जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि फल पकने के बाद मीठा हो जाता है। अन्न पकने के बाद स्वादिष्ट हो जाता है। घडा पकने के बाद उपयोगी हो जाता है। लेकिन मनुष्य पकने के बाद अन उपयोगी हो सकता है। चाहे वस्तु हो या व्यक्ति जब तक उपयोगी है तब तक उनका मुल्य है, मान – सम्मान है। जो व्यक्ति अंतिम समय तक अपनी उपयोगिता बनाये रखते है, वह आदरणीय होते है। शासन श्री ज्ञानवती जी ने अपनी उपयोगिता अन्त समय तक कम नही होने दी, अपनी उपयोगिता बनाये रखी। साध्वी श्री सलाह के मास्टर माइंड थे। ज्ञान के भण्डार थे।
साध्वी श्री शीतलरेखा जी ने साध्वी श्री ज्ञानवती जी को आचारनिष्ठ, संघनिष्ठ, गुरूनिष्ठ साध्वी बताया। साध्वी श्री कंचनबाला जी ने उनके साथ बिताये गये समय को बहुत ज्ञानवर्धक बताया तथा कहा कि उनमें अपनी भूलों को बहुत निश्छलता से स्वीकार करने की क्षमता थी।
साध्वी श्री कौशलप्रभा जी ने कहा कि गंगाशहर सेवा केन्द्र में चाकरी करने को कठिन बताया गया था। लेकिन हमें खुशी है कि यहाँ की चाकरी में अनुभव व ज्ञान का खजाना मिलता है। सबको अपना बनाने में प्रमोद भावना का गुण सबसे महत्वपूर्ण है। शासन श्री साध्वी ज्ञानवती जी में प्रमोद भावना, वात्सल्य, अपनेपन का विशिष्ट गुण था। शान्तिनिकेतन उनके बिना सुना लग रहा है।
गुणानुवाद सभा में संसारपक्षीय परिवार से श्वेता महनोत ने अपने विचार व्यक्त किये। लाडनूं से समागत उनके नातीले राजेश खटेड़ ने बताया कि ज्ञानवतीजी कहा करते थे कि बछराज जी खटेड़ के कारण ही मैने दीक्षा ली थी उस समय मेरे कभी कोई समस्या आती तो वो ही हल खोजते थे उनके परिवार ने भी मेरी बहुत सेवा की।
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा से पवन छाजेड़, महिला मंडल से संजू लालाणी, तेयुप से रोहित बैद, शान्तिप्रतिष्ठान से किशन बैद, अणुव्रत समिति से मनीष बाफना एवं राखी चोरडिया आदि कार्यकर्ताओं ने अपने भावो से श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
