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बीकानेर,बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज से भारत यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास अजेय वॉरियर-25 का आठवां संस्करण राजस्थान की पश्चिमी सीमा क्षेत्र की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज स्थित फौरन ट्रेनिंग नोड़ मे शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्र जनादेश के अंतर्गत आयोजित यह अभ्यास अर्बन क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित है। अभ्यास 14 दिन तक चला। कल होगा इसका समापन।

युद्धाभ्यास में भारतीय सेना की सिख रेजीमेंट के 120 और यूके 2 रॉयल गोरखा राइफल्स के 120 सैनिक भाग ले रहे हैं। युद्धाभ्यास के शुभारंभ अवसर पर भारतीय सेना के कर्नल नीरज बेनीवाल और यूके के डिफेंस अटैची लेफ्टिनेंट कर्नल साइमन डायसन ने युद्धाभ्यास के महत्व पर प्रकाश डाला। दो सप्ताह के दौरान प्रशिक्षण में ब्रिगेड स्तर पर संयुक्त मिशन योजना, एकीकृत सामरिक अभ्यास, सिमुलेशन-आधारित परिस्थितियां, तथा वास्तविक आतंकवाद-रोधी हालात को दशनि वाले कंपनी-स्तरीय फील्ड प्रशिक्षण शामिल होंगे। अभ्यास का उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, सामरिक दक्षता को बढ़ाना तथा जटिल परिस्थितियों में समन्वित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना है। 2011 से द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जा रहा अजेय वॉरियर भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना के बीच एक प्रमुख संयुक्त सैन्य सहभागिता के रूप में विकसित हुआ है। वर्ष 2025 का संस्करण प्रोफेशनलिज्म, सहयोग और क्षेत्रीव स्थिरता तथा वैश्विक शांति के प्रति साइरा प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करता है

यूके में हुआ था 7वां संस्करण : भारत-यूके (इंग्लैंड) के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास अजेय वॉरियर-23 का 7वां संस्करण का 27 अप्रैल से 11 मई 2023 तक सैलिसबरी मैदान, यूनाइटेड किंगडम में हुआ था। युद्धाभ्यास का पिछला संस्करण अक्टूबर 2021 में उत्तराखंड के चौबटिया में हुआ। यूनाइटेड किंगडम से सेकंड रॉयल गोरखा राइफल्स और भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट के सैनिकों ने सैन्य अभ्यास में भाग लिया था। अभ्यास के दायरे में बटालियन स्तर पर कमांड पोस्ट अभ्यास (सीपीएक्स) और कंपनी स्तर पर क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास (एफटीएक्स) करना शामिल था।

50 घरों के गांव में होगी आतंकियों की खोजबीन

भारत-यूके संयुक्त युद्धाभ्यास के लिए महाजन फायरिंग रेंज में 50 घरों के एक काल्पनिक गांव की रचना की गई है। यह एक ऐसा स्थायी ढांचा है, जहां विदेशी सेनाएं आकर एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन चलाती हैं। यूके की सेना भी भारतीय सेना के साथ मिलकर आतंकियों को मारने में एक दूसरे की तकनीक साझा करेंगे।

युद्धाभ्यास से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ेगा

भारत और यूके के बीच सैन्य अभ्यास का महत्व उनकी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना, रक्षा सहयोग बढ़ाना और आतंकवाद विरोधी अभियानों में संयुक्त क्षमताओं को बेहतर बनाना है। ये के बीच विश्वास, सौहार्द और अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं आपसी समझ को बढ़ाते हैं और उन्हें विभिन्न युद्ध परिदृश्यों में एक साथ काम करने के लिए प्रशिक्षण किया जाता है।

15 साल से चल रही संयुक्त भागीदारी

ब्रिटेन और भारत के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास की संयुक्त भागीदारी की शुरुआत वर्ष 2011 में शुरू हुई। दो-दो साल के अंतराल पर दोनों देशों की सैन्य टुकड़ी एक जगह जुटती है। फिर 14 दिन अपनी सैन्य क्षमताओं को निखारने और एक-दूसरे की युद्ध तकनीक को साझा करते हुए आतंकवाद से निपटने और युद्ध क्षेत्र में दुश्मन से मुकाबले की संयुक्त रणनीति पर काम करती है।

अजेय वॉरियर के इस निरंतर चल रहे अभ्यास ने भारतीय सेना और ब्रिटिश सेना के बीच एक नई सहभागिता को विकसित किया है। इस बार का यह संस्करण प्रोफेशनलिज्म, सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य के साथ शुरू हुआ है।

 

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