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श्रीडूंगरगढ़,बीकानेर,समाजसेवा और मानवता की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्वर्गीय चंद्रकला देवी बोरड का निधन उपरांत नेत्रदान किये गये। इस पुनीत कार्य की स्वीकृति उनके पति भीकमचंद बोरड तथा पुत्र सुरेंद्र बोरड, नरेंद्र जी बोरड एवं रवि बोरड द्वारा दी गई।

नेत्रदान के लिए प्रेरणा विजय बोथरा एवं अशोक बैद द्वारा प्रदान की गई। संपूर्ण नेत्रदान प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में नेत्रदान प्रभारी अशोक झाबक का विशेष योगदान रहा।

इस अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद् के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही, जिनमें परिषद् अध्यक्ष विक्रम मालू, पूर्व अध्यक्ष शांतिलाल झाबक, मंत्री पीयूष बोथरा, उपाध्यक्ष चमन एवं सहमंत्री मोहित बोरड शामिल रहे।

साथ ही मधु जैन, मंजू बैद, दिलीप जी बैद, गजेंद्र नाई, भागीरथ गोदारा सहित अनेक समाजसेवियों की उपस्थिति एवं सहयोग से यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

स्वर्गीय चंद्रकला देवी बोरड का यह नेत्रदान न केवल दो दृष्टिहीनों के जीवन में प्रकाश लाने वाला है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है। उपस्थित सभी गणमान्यजनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के इस निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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