










बीकानेर,भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर की अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) एवं ‘पशु आनुवंशिक संसाधनों पर नेटवर्क परियोजना (संरक्षण इकाई)’ के संयुक्त तत्वावधान में आज एक दिवसीय तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीकानेर जिले के आस-पास गांवों – सुरधणा, देशनोक, किंलचू, अक्कासर, पेमासर, गीगासर, सोआ, गुंसाईसर, सेरूणा, बदरासर, कतरियासर, नापासर, पलाना, श्रीरामसर, आदि के लगभग 155 पशुपालकों एवं किसानों की उत्साही सहभागिता रही।
केन्द्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने पशुपालकों की सक्रिय सहभागिता को कार्यक्रम की सार्थकता से जोड़ते हुए कहा कि एनआरसीसी का मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से पशुपालकों तक सीधे पहुँचाना है, कार्यक्रम में वैज्ञानिकों द्वारा पशुपालकों के समक्ष तकनीकी का प्रदर्शन न केवल उनके ज्ञान में अभिवृद्धि कर सकेगा अपितु यह उनकी आमदनी में बढ़ोत्तरी में सहायक सिद्ध हो सकेगा। डॉ. पूनिया ने ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों के कारण इसकी वैश्विक बाजार में उद्यमिता की नई संभावनाओं को भी उजागर किया।
‘पशु आनुवंशिक संसाधनों पर नेटवर्क परियोजना’ के प्रधान अन्वेषक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि ‘ऊँट पालन, प्रबंधन एवं उष्ट्र दुग्ध आधारित उत्पाद विकास’ विषयक तकनीकी प्रदर्शन में विशेषज्ञों द्वारा पशुपालकों को केन्द्र द्वारा संचालित अनुसंधान गतिविधियों डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई में ऊँटनी के दूध का प्रसंस्करण, उससे निर्मित दुग्ध उत्पाद, दाना-चारा उत्पादन इकाई में संतुलित पशु आहार, पशु प्रबंधन एवं उनकी स्वास्थ्य देखभाल आदि का व्यावहारिक ज्ञान करवाते हुए संबंधित उपयोगी जानकारी प्रदान की गई। श्री मनजीत सिंह, नोडल अधिकारी, एससीएसपी ने उप-योजना के प्रावधानों की जानकारी देते हुए इसे अनुसूचित जाति वर्ग की आर्थिक व सामाजिक सशक्तता हेतु भारत सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताया तथा पशुपालकों से इसका अधिकतम लाभ उठाने की बात कही।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बसंती ज्योत्सना, सह-समन्वयक डॉ. प्रियंका गौतम एवं डॉ. विश्वरंजन द्वारा तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुरूप केन्द्र की संचालित महत्वपूर्ण अनुसंधान गतिविधियों, इनके व्यावहारिक ज्ञान एवं उपादेयता को पशुपालकों के समक्ष सुचारु रूप से प्रदर्शित करवाया गया। वहीं डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, वैज्ञानिक ने विषयगत व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उन्हें कृषि सहायक संशाधनों (इनपुट्स) एवं ग्वार बीज आदि का वितरण किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार चौधरी, वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र कुमार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल, वित्त एवं लेखाधिकारी श्री आशीष पित्ती आदि भी मौजूद रहे वहीं कार्यक्रम के सफल निष्पादन में श्री राजेश चौधरी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी, श्री डिम्पल, सहायक, श्री विक्रम मीणा, एसएसएस, श्री अमित, वाईपी आदि ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
