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बीकानेर,प्रदेश के एकमात्र आवासीय खेल विद्यालय सादुल स्पोर्ट्स स्कूल के बाहर क्रीड़ा भारती के नेतृत्व में पूर्व खिलाड़ियों द्वारा चल रही भूख हड़ताल आज अपने 14 वें दिन में प्रवेश कर गई। 13 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक शिक्षा विभाग की भूमिका नकारात्मक ही साबित हो रही हैं। शिक्षा विभाग की उदासीनता और समस्या का समाधान करने में असमर्थता ने खिलाड़ियों और उनके समर्थकों के गुस्से को और बढ़ा दिया है।

बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत छात्र

सादुल स्पोर्ट्स स्कूल, जिसे प्रदेश के खेल प्रतिभाओं के निर्माण का केंद्र माना जाता है, वहां के छात्र बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं। खेल और शिक्षा का मेल कराने का दावा करने वाली सरकार और शिक्षा विभाग की अनदेखी के कारण, छात्रों को डाइट, उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे खिलाड़ियों ने इसे सरकार और प्रशासन की बड़ी असफलता करार दिया है।

क्रीड़ा भारती ने सरकार पर साधा निशाना

आंदोलन पर बैठे क्रीड़ा भारती के उपाध्यक्ष दानवीर सिंह भाटी ने शिक्षा विभाग और प्रशासन पर तीखा हमला करते हुए कहा,

“यह बहुत शर्मनाक है कि खिलाड़ियों को अपने अधिकारों के लिए धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग की अनदेखी और प्रशासन की निष्क्रियता ने साबित कर दिया है कि उन्हें प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की कोई परवाह नहीं है। नन्हे खिलाड़ियों की डाइट जैसी बुनियादी मांगों पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। यह पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।”

खिलाड़ियों ने चेताया: आंदोलन होगा और तेज

हड़ताल पर बैठे भैरुरतन ओझा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

क्रीड़ा भारती की मंशा साफ है कि “हम अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। अगर सरकार और प्रशासन जल्द ही हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं, तो यह आंदोलन एक बड़े जनांदोलन का रूप ले लेगा।”

सरकार और शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सवाल

13 दिनों से जारी हड़ताल के बावजूद शिक्षा विभाग और सरकार की चुप्पी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिकता है? यह स्थिति सरकार के उन दावों की पोल खोल रही है, जिसमें वे खेल और खिलाड़ियों के विकास की बात करती है।

आंदोलनकारियों का समर्थन बढ़ा

जैसे-जैसे आंदोलन लंबा खिंच रहा है, वैसे-वैसे इसे जनसमर्थन भी मिल रहा है। स्थानीय लोग, अभिभावक, और खेल से जुड़े अन्य संगठनों ने भी आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया है। सादुल स्पोर्ट्स स्कूल के पूर्व छात्रों का कहना है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

मांगें पूरी होने तक नहीं थमेगा आंदोलन

भाटी ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग और सरकार कब तक इस आंदोलन की अनदेखी करती है और खिलाड़ियों के सब्र का इम्तिहान कब तक चलता है।

सरकार को खेल प्रतिभाओं की उपेक्षा का यह रवैया बदलना होगा। वरना, खिलाड़ियों का यह आक्रोश सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बन सकता है।

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