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बीकानेर,संभागीय आयुक्त और मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के चैयरपर्सन डा. रवि कुमार सुरपुर ने पीबीएम सम्बध्द एसपी मेडिकल कालेज के विभागाध्यक्षों की मिटिंग ले ली है। डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ के मिलीभगत से 15 बच्चों की इलैक्टरौलाइट जांच के प्रकरण को पहले से ही गलत मान लिया है। इसकी जांच रिपोर्ट संभागीय आयुक्त और राज्य सरकार को मिल गई है। डा. रोहित, नर्सिंग औफिसर चेतन और ठेकेकर्मी अशोक लंगा को दोषी माना है। प्राइवेट लैब बंद करवा दी गई है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित कर दी गई है। यह तो घटना का एक उदाहरण है। सवाल यह है कि चिकित्सा सेवा में किस तरह से माफिया काम करते हैं। मिलीभगत से क्या- क्या होता है। क्या सरकार और प्रशासन की मंशा इस तरह कि गतिविधियों पर अंकुश लगाने की है क्या। डाक्टरों, नर्सिंग कर्मियों और मेडिकल स्टाफ की मिलीभगत से क्या- क्या हो रहा है। इसे जांच की अधीक्षक को कितनी फुर्सत है। जब बाड़ ही खेत को खाए तो व्यवस्था का क्या हश्र होना है यह बात बताने की जरूरत ही नहीं है। अब से पहले भी पीबीएम में मरीजों को रेफर करने, डाक्टरों के घरों में इलाज के लिए ले जाने, अस्पताल के उपकरण, सामग्री डाक्टरों के घरों में रोगियों के लिए प्रयुक्त होने, बिना जरूरत की झूठी जांच लिखने, जांच और अन्य सेवा में कमीशन तय होने, प्राइवेट लेबों से जांच करवाने के अनगिनत प्रकरण हुए हैं। कई बार इस प्रकरण की तरह मुद्दा उठाने पर हल्ला होता है। जांच, लीपा पोती और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जनता घटना को भूल जाती है। जैसा ढर्रा चलता है चलता रहता है। कई संभागीय आयुक्त इसके साक्षी बनकर चले जाते हैं। पीबीएम में रोगियों के साथ कितनी नाइंसाफी होती है। चिकित्सा सेवा में दलाल, लफंगे, माफिया किस तरह से चिकित्सा व्यवस्था को प्रभावित किए हुए हैं। इस कोकस को समझना थोड़ा मुश्किल काम है, क्योंकि सब काम सफेदपोश में हो रहा है। भले ही राज्य और केन्द्र सरकार ने निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था कर दी हो, परन्तु मेडिकल माफिया से रोगी का पारपाना मुश्किल काम है। बस जरूरत इस कोकस के घेरे में आने की है। संभागीय आयुक्त इस घटना के प्रति कितनी गंभीरता दिखाते हैं और ऐसे और कार्यों को बंद करवा पाते हैं। यह तो समय ही बताएगा। संभागीय आयुक्त अगर इस घटना को उदाहरण मानकर पीबीएम में बाकी हो रहे ऐसे कामों पर अंकुश लगा सकें तो वाकय जनता का भला हो सकेगा। साथ ही उनका संभागीय आयुक्त और सोसायटी का चैयरपर्सन होना साबित हो सकेगा। अन्य तो नई बात नौ दिन खींच तान दस दिन। वो ही ढाक के तीन पात रहने वाले हैं।

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