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बीकानेर,राजस्थान में राजस्थानी भाषा को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बीकानेर के एक निजी विद्यालय ने ऐतिहासिक पहल करते हुए राजस्थानी भाषा शिक्षण का शंखनाद कर दिया है। श्रीरामसर रोड़ स्थित संत सांईनाथ पब्लिक स्कूल में ‘हरख-उच्छब’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी भाषा पढ़ाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने बताया कि दो दिन पूर्व भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा राजस्थान की 12 करोड़ जनता की वर्षों की मांग को वाजिब ठहराते हुए राजस्थान सरकार को आदेश जारी किया गया कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर क्रमबद्ध रूप से राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में पढ़ाया जाए। इस हेतु न्यायालय ने राजस्थान सरकार को 30 सितम्बर तक का समय भी दिया है। इस समाचार से सारे राजस्थानी प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
इसी क्रम में बीकानेर की संत सांईनाथ पब्लिक स्कूल के सचिव डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने अभिभावकों की त्वरित मांग को सुनकर विद्यालय में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी विषय को पढ़ाने की घोषणा की। शाला सचिव ने अपने उद्धोबधन में कहा कि जब तक सरकार की ओर से इस हेतु कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक विद्यार्थियों को राजस्थानी भाषा ऐच्छिक विषय के रूप में हमारे विद्यालय में पढ़ाई जाएगी। जिसके अंतर्गत राजस्थानी शब्द, संस्कृति, साहित्य एवं संस्कारों का अध्ययन करवाया जाएगा। कक्षा 5वीं से कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को राजस्थानी व्याकरण का ज्ञान भी करवाया जाएगा। इसके लिए छात्र छात्राओं को विद्यालय में ‘विद्यार्थी राजस्थानी व्याकरण’ पुस्तक भी दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुधा आचार्य ने कहा कि मुझे बहुत खुशी हो रही है कि यह विद्यालय राजस्थान का पहला विद्यालय होगा जिसमें बच्चों को राजस्थानी विषय पढाया जाएगा। इसके साथ आपने कहा कि बच्चों को साल में एक बार राजस्थानी ड्रेस एवं लोक गीत कॉम्पीटिशन का आयोजन भी करवाना चाहिए जिससे बच्चों के मन में अपनी संस्कृति के प्रति स्हेन भाव जागृत हो। इस अवसर पर मोट्यार परिषद के डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि विद्यालय में राजस्थानी भाषा को पढ़ाना अपने-आप में बड़े गर्व की बात है और विशेष तौर पर यहां के अभिभावकों को बहुत-बहुत बधाई देना चाहूंगा जो अपने बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना चाहते हैं। मोट्यार परिषद के जिलाध्यक्ष हिमांशु टाक ने कहा कि बच्चों का अपनी मायड़ भाषा के प्रति प्रेम भाव को देखकर लगता है कि अब समय दूर नहीं कि इस भाषा को भारत सरकार जल्द ही संविधान की 8वीं अनुसूचि में शामिल कर लेगी। कवि राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि हमें राजस्थानी भाषा के साथ सभी विषयों को भी अच्छे से पढ़ना होगा ताकि हमारा र्स्वांगीण विकास हो सके। राजेश चौधरी ने कहा कि अब राज्य सरकार को इस हेतु कोई ठोस कदम उठाना चाहिए तथा जल्द ही राजस्थानी भाषा को राज्य की दूसरी राजभाषा घोषित कर देनी चाहिए।
श्रीमती सुधा आचार्य द्वारा किए गये शंखनाद के साथ शाला सचिव डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने विद्यालय में राजस्थानी भाषा पढ़ाए जाने की उद्घोषणा की जिसका कार्यक्रम में आए सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों ने करतल ध्वनि करके साथ दिया। इस अवसर पर राजेन्द्र जोशी ने राजस्थानी पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को तीन वर्षों तक राजस्थानी की पुस्तकें, कॉपी और पेंसिल अपनी ओर से देने की घोषणा की। प्रधानाध्यापक श्री भवानीशंकर आचार्य ने सबका धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि हमारा दायित्व होगा कि हम अपनी मायड़ भासा से सभी बच्चों को जोड़ेगे और उन्हें अपनी संस्कृति से अवगत करवाएंगे। कार्यक्रम में मोट्यार परिषद के राजूनाथ, पप्पूसिंह के अलावा प्रहलाद पुरोहित, सुनीता आचार्य, ममता सुथार, अंशु शर्मा, नंदिनी व्यास, भास्कर आचार्य, गुंजन गिरी, चंचल, भावना आचार्य, किरण भाटी, हरीश शर्मा, दिव्या राजपुरोहित, ज्योतिका सेवग, विष्णु सांखला के अलावा अनेक मौहल्लेवासियों तथा अभिभावक उपस्थित रहे।

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