











बीकानेर,जालवाली। गांव की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और छोटे किसानों में आत्मनिर्भरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, गुरु जंबेश्वर सेवा संस्थान, जयपुर द्वारा जालवाली ग्राम पंचायत में बकरी पालन पर 10 दिन का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरु किया गया। यह पहल नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट नाबार्ड के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम खास तौर पर बीकानेर जिले की गांव की महिलाओं और छोटे किसानों को टेक्निकल एक्सपर्टीज़ और सस्टेनेबल बिजऩेस प्रैक्टिस देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि उन्हें पारंपरिक पशुपालन को एक फ़ायदेमंद काम में बदलने में मदद मिल सके।
एक्सपर्ट की राय और गाइडेंस
शुरुआती सेशन में रूरल डेवलपमेंट और वेटेरिनरी साइंस के फील्ड के जाने-माने एक्सपट्र्स डीडीएम नाबार्ड मुख्य अतिथि के रूप में रमेश तांबिया शामिल हुए। उन्होंने फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस लाने वाली ज़मीनी पहलों को सहयोग करने में नाबार्ड की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि बकरी पालन—जिसे अक्सर ‘गरीब आदमी की गाय’ कहा जाता है, एक मज़बूत और ज़्यादा पैदावार वाला पशुधन ऑप्शन है। जिसमें कम से कम इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है। लेकिन, यह ग्रामीण परिवारों के लिए अच्छा रिटर्न देता है।
सीनियर साइंटिस्ट, (सी एस डब्ल्यू आर आई) आशीष चोपड़ा ने बकरी मैनेजमेंट के मॉडर्न साइंटिफिक तरीकों के बारे में जानकारी शेयर की। उन्होंने पशुओं की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पक्का करने के लिए ब्रीड चुनने, बीमारी की रोकथाम और सही फीडिंग शेड्यूल के महत्व पर चर्चा की।
गुरु जंबेश्वर सेवा संस्थान, जयपुर के सचिव धर्मपाल ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस 10-दिन की कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य यह पक्का करना है कि भागीदार न सिर्फ़ जानकारी के साथ जाएं, बल्कि अपनी व्यवसायिक बकरी यूनिट्स को मैनेज करने का विश्वास भी लेकर जाएं।
एम्पावरमेंट और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
ट्रेनिंग करिकुलम में कई ज़रूरी टॉपिक शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं:
साइंटिफिक ब्रीडिंग:राजस्थान के सूखे मौसम के लिए सही अच्छी क्वालिटी की नस्लों की पहचान करना।
हेल्थकेयर मैनेजमेंट:मौसमी बीमारियों का समय पर वैक्सीनेशन और मैनेजमेंट।
मार्केट लिंकेज:यह समझना कि बेहतर मार्केट तक कैसे पहुंचें और मीट और दूध के लिए अच्छे दाम कैसे पाएं।
फाइनेंशियल लिटरेसी: किसानों को यह सिखाना कि बिजऩेस बढ़ाने के लिए सरकारी स्कीमों और क्रेडिट सुविधाओं का फ़ायदा कैसे उठाया जाए।
एक आत्मनिर्भर राजस्थान बनाना
इस इवेंट में स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ रही, जिन्होंने अगले नौ दिनों में प्लान किए गए प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन के लिए बहुत उत्साह दिखाया। जालवाली ग्राम पंचायत पर फोकस करके श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान और नाबार्ड का मकसद स्किल्ड पशुपालकों का एक लोकल ‘हब’ बनाना है। जो, आस-पास के गांवों को प्रेरित कर सकें। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, प्रतिभागी को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और पूरा होने पर सर्टिफिकेट मिलेंगे, जिससे उन्हें अपने व्यवसाय के लिए इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट पाने में और मदद मिलेगी।
