











बीकानेर,बीकानेर में सम्पैल सर्वे में दस लोग जिसमें दो युवा, दो महिलाएं, दो गोचर खेजड़ी के आन्दोलनकारी और दो-दो भाजपा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सरकार और प्रशासन के बारे में पूछा गया तो अधिकांश लोगो ने कहा कि सरकार फेल है। प्रशासन मनमानी करता है। किसी की सुनावई नहीं होती। अगर आप पूछेंगे तो अधिकांश लोग यही कहते सुनाई देंगे। कांग्रेस के नेता तो समय समय पर सार्वजनिक मंचों से यही बात कहते रहे हैं जो भाजपा के वरिष्ठ नेता देवी सिंह भाटी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के बीकानेर यात्रा के दौरान उनके हवाले से कह रहे हैं। यह बात भाजपा के युवा नेता भगवान सिंह मेडतिया ने युवाओं के शिष्ट मंडल के साथ अगल- अलग समय अधिकारियों से कही थी कि सडकें बदहाल, नाली नाले सीवरेज अवरूध्द है। भाजपा के और लोग भी पीछे से दबी जुबान कहते हैं कि प्रशासन काम उन्ही लोगों का करता है जो मंत्रियों की परिक्रमा करते हैं। युवा भाजपा नेता ने तो अस्पताल के गेट का ताला तोड़कर रास्ता खोला। यानि प्रशासन के जनहित के मामलों में अनदेखी की पराकाष्ठा है।
जनता सवाल उठाती रही है कि प्रशासन कायदे से काम नहीं कर रहा है, बल्कि मंत्रियों के इशारे पर चल रहा है। यहां तक कि भाजपा विधायक भी यह शिकायत कर चुकें है कि प्रशासन उनकी नहीं सुनता। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़ ने इसी शिकायत की ताईद की और चेतावनी दी कि प्रशासन को जन प्रतिनिधियों की सुननी पड़ेगी। अब देवी सिंह भाटी वो बात पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से कह रहे हैं तो आम जनता अर्से से कहती रही है।
“भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी कह रहे हैं कि वसुंधराराजे ने दुखी मन से भावना व्यक्त कि बीकानेर में सड़कों की यह कैसी दुर्गति हो रही है। कोई देखने वाला नहीं है। भाटी ने कहा कि सरकार में बैठे लोग अधिकारियों पर विश्वास कर रहे हैं। उनके कारण तो लुटिया डूब जाएगी। सड़कें, नाली, नाले, सीवरेज की निगरानी जिला कलक्टर की जिम्मेदारी है। सड़कों पर एक पेंच नहीं लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कही जन सुनवाई नहीं हो रही है। राजस्व मामलों में फैसले अदालत का काम देख लें उनका रिकार्ड देख लें। अधीनस्थ अधिकारियों का काम देख लें। आम लोगों को कहीं राहत नहीं है। खुले आम खेल हो रहा है। भाटी ने आरोप लगाया कि बीडीए में शामिल 98 गांवों में कागजो पर पैसिंल से लकीर खींच कर 100 फीट की सड़क बनाने के सौदे हो रहे है। 50 लाख, 40 लाख। कलेक्ट्रेट में 4 बजे मीटिंग होती है तो अधिकारी फैसले लेते है कि कितने लिए कितने दिए। म्युटेशन के 30-30 लाख पटवारी ले रहे हैं। मुख्यमंत्री को अवगत कर दिया है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार पैसे लगाकर विकास के काम करवा रही है। अधिकारियों के भरोसे आम जन का कोई काम नहीं होगा।“
भाटी का एक चैनल को दिए इस इंटरव्यू का मंतव्य चाहे जो कुछ भी हो। यह बात सच है कि सड़कें बदहाल है। सीवरेज, नाली , नाले से जनता परेशान है। आम जन कि सुनवाई नहीं होती। प्रशासन केवल नेताओं की सुनता है। आम आदमी की नहीं। इसके परिणाम गोचर- खेजड़ी जैसे बड़े आन्दोलन सरकार की बदनामी के कारण बने। कुशल प्रशासक स्थिति यहां तो पहुंचने ही नहीं देता। आज जो हुआ वो आन्दोलन के प्रारंभ में भी हो सकता था। जिला कलक्टर के रवैयै के बारे में तो कई बातें सुनने को मिल सकती है। सरकार आम जन कि नहीं तो भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं की तो सुन लो। नहीं तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे और देवी सिंह भाटी ने जो कहा सुनो। सुनो तो सही।
