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बीकानेर,अंतराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 की थीम सहकारिता एक बेहतर विश्व का निर्माण करती है के उद्देश्य से प्रशासक एवं प्रबंध संचालक आरसीडीएफ श्रुति भारद्वाज के निर्देशानुसार उरमूल डेयरी की ओर से स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तकनीक पर जयसिंहदेसर मगरा के विवेक नगर दुग्ध समिति परिसर में पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
समिति के अध्यक्ष खेमाराम व सचिव श्रीनिवास के सहयोग से एन पी पी डी परियोजना अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में उरमूल डेयरी पूर्व चेयरमैन हेतराम,प्रभारी पीएण्डआई मोहनसिंह चौधरी,जेडी मगरा के सरपंच जगदीश खीचड़, पीथरासर दुग्ध समिति के सचिव सोहनलाल का साफा पहनाकर स्वागत किया गया।
अक्षय निधि प्रोजक्ट के प्रशिक्षक अमित कुमार ने पशुपालकों को जानकारी दी कि डेयरी फार्मिंग में जितना महत्वपूर्ण दूध का उत्पादन होता है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्वच्छ दूध का उत्पादन होना होता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्र पर पंजीकृत 100 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया । प्रशिक्षण समापन अवसर प्रभारी पी एण्ड आई मोहन सिंह चौधरी ने बताया कि दूध मानव जीवन के लिये सर्वोत्तम पेय पदार्थ है तथा दूध प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है,वहीं अशुद्ध दूध कई किस्म की बीमारियों का वाहक भी हो सकता है। उन्होने अशुद्ध दूध शीघ्रता से खराब होता है तथा बाजार में इसका उचित मूल्य भी नहीं मिलने की बात कही। उरमूल डेयरी के पूर्व चेयरमैन हेतराम ने बताया कि स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के लिए आवश्यक है कि दुधारू पशु निरोग तथा स्वस्थ हो। उन्होंने पशुओं के कई रोग जैसे क्षय रोग, आन्तरिक ज्वर, ब्रूसेलोसिस इत्यादि ऐसे रोग हैं जो दूध के माध्यम से पशुओं से मनुष्य में फैलते है, अतः केवल निरोग गाय को ही दुग्ध उत्पादन हेतु उपयोग करना चाहिए। उन्होंने रोगी पशु के दूध को अलग रखने की तथा इसे जीवाणु रहित बनाने के बाद ही उपयोग करने को कहा। मूल्य संवर्धन तकनीको मे दुग्ध संचयन, पैकेजिंग,प्रशीतन, परिवहन, और विभिन्न उत्पादों के तौर पर प्रसंस्करण की सभी क्रियाओं पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पशु का स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई, दूध दुहने वाले मनुष्य का स्वास्थ्य एवं सफाई, पशुशाला की सफाई एवं बनावट, दूध दुहने वाले बर्तन की बनावट तथा उसकी सफाई, पशुशाला से दूध हटाने का समय इत्यादि पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
जे डी मगरा के सरपंच जगदीश खीचड़ ने मूल्य सवर्धन एवं दुग्ध मार्केटिंग पर चर्चा करते हुये बताया कि दूध दूहने का कार्य ग्वालों द्वारा कराया जाता है तथा ग्वालों की सफाई तथा उनकी आदतों का दूध की स्वच्छता पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने दूध दूहने में स्वस्थ एवं अच्छी आदतों के ग्वालों को ही लगाने तथा उनके कपड़े साफ, नाखून कटे हुए, सिर टोपी से ढका हुआ हो तथा कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व हाथ रोगाणुनाशक घोल से धोये जाने की बात कही।
उरमूल डेयरी के आरपी रामलाल, अनिल कुमार, रामचन्द्र ने कार्यक्रम आयोजन में सहयोगी रहे। डेयरी आरपी रामलाल ने गोपाल क्रेडिट योजना के तहत ब्याज रहित एक लाख ऋण कॉपरेटिव बैंक द्वारा दिए जाने के बारे में जानकारी दी।

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