
बीकानेर,कोलकाता के बड़ा बाजार क्षेत्र में कलाकार स्ट्रीट ढाका पट्टी पर मनसापूर्ण गवरजा चार दिवसीय मेला महोत्सव शुरू हुआ। मनसापूर्ण गवरजा मेले के उद्घाटन के अवसर बीकानेर से पहुंचे मुख्य वक्ता के रूप में रमक झमक के अध्यक्ष एवं ‘म्हारी गणगौर’ पुस्तक के लेखक सम्पादक प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोलकाता जैसे महानगर में रहकर भी बीकानेरी लोगों ने अपनी परम्परा व सस्कृति को कायम रखा है। इसके लिए वे बधाई के पात्र है। ओझा ने कहा कि ‘गणगौर द्वार’ बनने से कोलकाता में बसे बीकानेर वासियों का तो मान सम्मान बढ़ा ही है बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान के गणगौर प्रेमियों का चाहे वे देश या विदेश के किसी कोने में रह रहे हो उनका भी गौरव बढा है क्योंकि कोलकाता में कलाकर स्ट्रीट के पास बना ‘नव रूपा गणगौर’ द्वार विश्व का सम्भवतः पहला द्वार है जो गणगौर के नाम से बना है।आने वाले समय मे जैसे जैसे जानकारी अन्य लोगों को मिलेगी गणगौर प्रेमी पर्यटक भी यह खूब आएंगे और गौरवान्वित होंगे कि राजस्थान की गणगौर के सम्मान में प.बंगाल प्रांत में ऐसा द्वार बनाया है जो दोनों राज्यों की सांस्कृतिक एकता व समन्वय को दर्शाता है। यह द्वार आम जन को एक खूबसूरत संदेश देता है।
इस अवसर पर मनसापूर्ण गणगौर गायन मण्डली ने भगवान गणेश,गवरजा व इसर की वंदना कर गीतों को प्रतुतयां दी।लाल रंग की एक ही प्रकार की पाग बांधे कलाकरों ने भावपूर्ण हो गीतों की प्रस्तुतियां दी। आर्गन,तबला,ढोलक आदि पर संगत हुई।
इस अवसर पर मण्डली की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
समारोह के मुख्य वक्ता रमक झमक अध्यक्ष, ‘म्हारी गणगौर’ पुस्तक के लेखक व सम्पादक,सस्कृतिकर्मी प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’, के साथ मंच पर अतिथि के रूप में कन्हैया लाल बाहेती,एन डी व्यास,मीना पुरोहित,महेश शर्मा, राधाकिशन हर्ष,सपन बर्मन,विजय ओझा,सुशील पुरोहित एवं ज्योतिषी ममू महाराज उपस्थित थे।अतिथियों का स्वागत गोपाल व्यास एवं जेठमल रंगा,केदार उपाध्याय,राजकुमार व्यास काकू एवं उनकी टीम द्वारा स्मृति चिन्ह,ओपरणा भेंट कर व लाल पाग पहना कर किया गया।। संयोजन अशोक व्यास सुश्री वैभवी थानवी ने किया