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बीकानेर,जयपुर,संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान ने शिक्षा निदेशालय, प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर द्वारा 25 नवंबर को जारी आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है। आदेश में यह स्वीकार किया गया है कि 7 निजी विद्यालयों ने आरटीई के तहत चयनित निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रवेशित बच्चों को प्रवेश देने से इनकार किया — बावजूद इसके विभाग ने केवल औपचारिक पत्राचार कर अपनी जिम्मेदारी समाप्त मान ली है।

संघ ने कहा कि पिछले सात महीनों में राजधानी जयपुर के 60 से अधिक निजी विद्यालयों को विभाग द्वारा अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किए जा चुके हैं, फिर भी आज तक किसी भी विद्यालय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि निर्धारित समयसीमा बीते हुए भी डेढ़ से दो महीने से अधिक समय हो चुका है।

आरटीई में 7 महीने से लंबित दाखिले  आखिर दोषी कौन?

आरटीई सत्र 2025–26 की प्रक्रिया 25 मार्च से प्रारंभ हुई थी और 9 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से 80,000 से अधिक बच्चों का प्रवेश हेतु चयन हुआ। लेकिन –
9 अप्रैल से आज तक 7 महीने से अधिक समय गुजर चुका है।

अभिभावक विभाग और स्कूलों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं।

44,060 से अधिक बच्चे आज तक स्कूल नहीं जा पाए।

निजी विद्यालय साफ शब्दों में बच्चों को प्रवेश देने से मना कर रहे हैं और शिक्षा विभाग के नोटिसों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। विभाग मात्र पत्र लिखकर ‘औपचारिकता’ निभाने में लगा हुआ है  न सख्त कार्रवाई, न प्रवेश सुनिश्चित।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि शिक्षा विभाग स्वयं निजी स्कूलों की कठपुतली बन गया है, और कार्रवाई करने की बजाय जिम्मेदारी से बचता हुआ दिखाई दे रहा है।

प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा: “आरटीई कानून बच्चों का संवैधानिक अधिकार है। इससे खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जब विभाग के पास सभी प्रमाण मौजूद हैं तो 7 महीने से कार्रवाई क्यों लंबित है? क्या शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की मनमानी के आगे समर्पण कर चुका है? यदि विभाग अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पा रहा तो यह बच्चों और अभिभावकों के साथ खुली धोखाधड़ी है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग तत्काल इन विद्यालयों की मान्यता/एनओसी पर कार्रवाई नहीं करता है, तो संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा करने को मजबूर होगा।

संयुक्त अभिभावक संघ की प्रमुख मांगें

आरटीई के तहत जिन विद्यालयों ने प्रवेश नहीं दिया, उनकी मान्यता/एनओसी तुरंत निलंबित की जाए।

सभी प्रभावित बच्चों को तत्काल प्रवेश दिलवाकर इसका सार्वजनिक अनुपालन जारी किया जाए।

शिक्षा विभाग की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

पूरे राजस्थान में आरटीई अनुपालन हेतु स्कूल-स्तरीय मासिक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाए।

 

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