











बीकानेर,राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता और शिक्षा में तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने की वर्षों पुरानी मांग को अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने के लिए राजस्थानी भाषा प्रेमी और साहित्यकार मईनुदीन कोहरी ‘नाचीज़ बीकानेरी’ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी पर गहरा क्षोभ प्रकट हुए सीधे तौर पर राजस्थान के जनप्रतिनिधियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही इस मुद्दे को “हल्के” में ले रहे हैं, जिसके कारण करोड़ों राजस्थानियों की मातृभाषा आज भी अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है
नाचीज़ बीकानेरी ने कड़े शब्दों में कहा कि अब तक विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक को अनगिनत ज्ञापन दिए जा चुके हैं, धरने-प्रदर्शन हुए और विदेशों में बैठे प्रवासियों ने भी आवाज बुलंद की, लेकिन परिणाम आज भी ‘वही ढाक के तीन पात’
राज नेताओं को अब दिखावा नहीं हकीकत में अमलीजामा पहनाने तक काम करना ही सच्ची जन व भासा की सेवा होगी
“शपथ लेकर वाह-वाही लूटी, अब काम भी करके दिखाएं”
कोहरी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के दोहरे मापदंडों पर तंज करते — याद दिलाया कि कई विधायकों ने विधानसभा में राजस्थानी भाषा में शपथ लेकर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन जब सदन में कानून बनाने या सामूहिक दबाव डालने की बात आती है, तो वे खामोश हो जाते हैं। हालां कि 102 विधायकों के हस्ताक्षर का ज्ञापन दिया ,क्या हुआ उसका ?
शपथ लेने की बात करने वाले विधायक/सांसद अपने राजनैतिक जीवन में तो निश्चित रूप से मजबूत स्तंभ: है । अब उनको जन आंदोलन की तरह भाषा के लिए आंदोलन करना चाहिए। नाचीज़ बीकानेरी ने कहा कि यदि वर्तमान और भूतपूर्व विधायक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संयुक्त रूप से इस मुद्दे को उठा कर संघर्ष करते हैं तो सफलता सुनिश्चित है। राजस्थान के सभी पार्टियो के लोग व सभी पूर्व व वर्तमान विधायकगण /सांसद अपनी ताकत का एहसास करते हैं तो सरकार को मजबूर होकर मायड़ भाषा को मान्यता व राज्य की तीसरी भाषा के आदेश देने हीपड़ेंगे ।
21 फरवरी: ‘मातृभाषा दिवस’ पर आर-पार की जंग के लिए नाचीज़ बीकानेरी ने सभी राजनैतिक दलों को एक मंच पर आने का आह्वान किया कि अनिश्चितकालीन कदम: उठाने व वर्तमान विधानसभा सत्र के दौरान सभी विधायक एकजुट होकर राजस्थानी को मान्यता दिलाने के लिए अनिश्चितकालीन ठोस कदम उठाएं , वक़्त की नजाकत को समझे ।
भाषा मान्यता के लिए प्रदेश के सभी भाषा संगठनों को भी एक जाजम पर आने: व साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों से भी अपील की है कि सभी संगठन एक जाजम पर बैठकर इस आंदोलन को अनवरत जारी रखें।
10 करोड़ राजस्थानियों के सम्मान का सवाल है
राजस्थानी को मान्यता मिलने से हिंदी भाषा को कोई नुकसान नहीं, बल्कि बल ही मिलेगा। नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान है, ऐसे में राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार की टालमटोल नीति अब असहनीय है।
मेरे प्रदेश के नेताओं “ यह 10 करोड़ राजस्थानियों के सम्मान की बात है, जिसे सदन और संसद में बुलंद करना अब विधानसभा व संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी है।”
जय राजस्थानी जय जय राजस्थानी जय राजस्थानी
