












बीकानेर,पंडित दामोदर प्रसाद कठातला भारतीय ग्रामीण संस्कृति, धर्म और शास्त्रीय मर्यादाओं के जीवंत प्रतीक थे। उनका संपूर्ण जीवन कर्म, साधना और सेवा को समर्पित रहा। वे केवल विद्वान पंडित ही नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले मार्गदर्शक थे।
राजनीति से सदैव दूर रहते हुए उन्होंने निष्पक्षता, सादगी और सात्विकता के मूल्यों को अपनाया। गांव और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक एवं सामाजिक परंपराएं उनके मार्गदर्शन के बिना अधूरी मानी जाती थीं। कर्म को उपासना मानने वाले पंडित जी ने शास्त्रों को जीवन में उतारकर जनसेवा का माध्यम बनाया। उनका देवलोक गमन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, परंतु उनके संस्कार, विचार और आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
विनम्र श्रद्धांजलि।
