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बीकानेर,बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा रही है, साथ ही विशेष तौर से हिन्दी, उर्दू एवं राजस्थानी साहित्य का सृजन निरन्तर होता रहा है और बीकानेर का भाषा समन्वय एवं अपनत्व की पहचान प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में है।
बीकानेर की ऐसी साहित्य विरासत और उसको संजोने वाली प्रतिभाओं का सम्मान करना नगर की परंपरा रही है। इसी परंपरा का निर्वहन दशकों तक बीकानेर नगर विकास न्यास द्वारा किया जाता रहा है। परन्तु वर्तमान में उक्त सम्मान-पुरस्कार प्रदत्त करने की परंपरा का निवर्हन नहीं हो रहा है।
इस संदर्भ में राजस्थानी युवा लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने बताया कि न्यास के कार्यकाल के समय बंद हुए पुरस्कार बाबत पूर्व में भी मांग की गई थी। परन्तु उस पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
कमल रंगा एवं क़ासिम बीकानेरी ने बताया कि वर्तमान में बीकानेर विकास प्राधिकरण बन चुका है। ऐसी स्थिति में बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा बीकानेर के रचनाकारों को पुरस्कृत करने की परंपरा को नए सिरे से प्रारंभ किया जाना चाहिए। जिसमें पूर्व की भांति साहित्य, समाजसेवा, पत्रकारिता, उद्योग जगत, रंगकर्म आदि क्षेत्र में प्रतिभाओं को पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
इस संबंध में आज रचनाकारों की एक बैठक संस्था कार्यालय में कमल रंगा की अध्यक्षता में रखी गई। जिसमें वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी, कवि गिरिराज पारीक कवयित्री इन्द्रा व्यास, कवि जुगल किशोर पुरोहित, कवि पुनीत कुमार रंगा, कवि गंगाबिशन बिश्नोई, हरिकिशन व्यास, समाजसेवी हरिनारायण आचार्य, भवानी सिंह, संस्कृतिकर्मी आशिष रंगा, कन्हैयालाल पंवार आदि ने सर्वसम्मति से निर्णय लेकर बीकानेर विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष महोदया से अनुरोध किया है कि उक्त पुरस्कार इस वर्ष गत परंपरा के अनुसार 26 जनवरी, 2026 से प्रारंभ करने हेतु उचित कार्यवाही करवावें।

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