
बीकानेर, तप,त्याग और धर्म का विशेष महत्व रखती है नर्मदा परिक्रमा। सनातन धर्म में नर्मदा परिक्रमा जीवन का सबसे बड़ा तीर्थ कहा गया है। यह उद्गार राष्ट्रीय संत श्रीसरजूदासजी महाराज ने नर्मदा तीर्थ परिक्रमा के दौरान व्यक्त किए। श्रीसरजूदासजी महाराज ने बताया कि परम पूज्य श्री सियाराम जी गुरु महाराज की कृपा एवं श्रीरामदासजी गुरु महाराज के सान्निध्य में विगत 26 मार्च 2025 को नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ की गई है तथा लगभग 25 अप्रेल 2025 तक यह परिक्रमा पूर्ण होने की संभावना है। राष्ट्रीय संत श्रीसरजूदासजी महाराज ने बताया कि नर्मदा परिक्रमा वाकई में एक ऐतिहासिक तीर्थ दर्शन यात्रा है। अलसुबह नर्मदाजी में स्नान के साथ ही नर्मदा पूजन व आरती के बाद यात्रा प्रस्थान और फिर शाम को पूजन-आरती का आयोजन होता है। शाम से रात्रि के समय तक तप-ध्यान के साथ सभी श्रद्धालुओं के साथ संकीर्तन करना आत्मीय शांति प्रदान करता है। पुराणों में ऐसा कहा गया है कि एक बार नर्मदा यात्रा कर लेने से जिंदगी बदल जाती है, व्यक्ति के पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि, नर्मदा परिक्रमा को काफी कठिन माना जाता है और ये भी कहा जाता है कि नर्मदा परिक्रमा कर लेने से व्यक्ति को जीवन के कई सारे ज्ञान एक साथ हो जाते हैं।
*नर्मदा के तट पर स्थित प्रमुख तीर्थ*
नर्मदा के तट पर बहुत सारे तीर्थ स्थित है जिनमें अमरकंटक, मंडला (राजा सहस्रबाहु ने यही नर्मदा को रोका था), भेड़ा-घाट, होशंगाबाद (यहां प्राचीन नर्मदापुर नगर था), नेमावर, ओंकारेश्वर, मंडलेश्वर, महेश्वर, शुक्लेश्वर, बावन गजा, शूलपाणी, गरुड़ेश्वर, शुक्रतीर्थ, अंकतेश्वर, कर्नाली, चांदोद, शुकेश्वर, व्यासतीर्थ, अनसूयामाई तप स्थल, कंजेठा शकुंतला पुत्र भरत स्थल, सीनोर, अंगारेश्वर, धायड़ी कुंड और अंत में भृगु-कच्छ अथवा भृगु-तीर्थ (भडूच) और विमलेश्वर महादेव तीर्थ आदि शामिल है।
*दुनिया की इकलौती नदी जिसकी परिक्रमा की जाती है*
अमरकंटक से अवतरित हुई नर्मदा बाकी नदियों के ठीक विपरीत पश्चिम दिशा की ओर उल्टी बहती है और विपरीत दिशा में बहने वाली देश की सबसे बड़ी नदी है। नर्मदा दुनिया की इकलौती ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की जाती है. अभी तक आपने देवी-देवताओं और मंदिरों की परिक्रमा करते हुए सुना होगा लेकिन मां नर्मदा की परिक्रमा अद्भुत है। ऋषि मार्कंडेय ने अपने भीतर के प्रकाश को प्रज्ज्वलित करने के लिए मां नर्मदा की परिक्रमा की थी. स्कंद पुराण, शिव पुराण और अन्य हिंदू ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि नर्मदा परिक्रमा करने वाले प्रथम व्यक्ति ऋषि मार्कंडेय थे. उन्होंने नर्मदा के दोनों तटों पर स्थित लगभग 999 सहायक नदियों को बिना पार किए, प्रत्येक नदी के स्रोत की परिक्रमा करते हुए यह यात्रा पूरी की. इस परिक्रमा को संपन्न करने में उन्हें पूरे 45 वर्ष लगे थे.
*इन नियमों के साथ होती है परिक्रमा*
कुछ लोग कहते हैं कि यदि अच्छे से नर्मदाजी की परिक्रमा की जाए तो नर्मदाजी की परिक्रमा 3 वर्ष 3 माह और 13 दिनों में पूर्ण होती है, परंतु कुछ लोग इसे 108 दिनों में भी पूरी करते हैं। हालांकि अब यात्रा का प्रारुप बदल गया है, यात्रा को आसान भी किया गया है। रामझरोखा कैलाशधाम के पीठाीधीश्वर श्रीसरजूदासजी महाराज ने बताया कि गुरु महाराज के सान्निध्य में 31 दिनों में नर्मदाजी की परिक्रमा का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही परिक्रमा के दौरान प्रतिदिन नर्मदाजी में ही स्नान किया जाता है, प्रदक्षिणा में दान ग्रहण न किया जाता। श्रद्धापूर्वक कोई भोजन कराए तो कर सकते हैं, आतिथ्य सत्कार का अंगीकार करना तीर्थयात्री का धर्म है। त्यागी, विरक्त संत तो भोजन ही नहीं करते भिक्षा करते हैं जो अमृत सदृश्य मानी जाती है। यात्रा के दौरान व्यर्थ वाद-विवाद, पराई निदा, चुगली नहीं करना तथा वाणी पर संयम जरूरी होता है।