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बीकानेर,पुष्करणा सावा में हर समाज के लोगों को जोड़कर आयोजन करने और सावा के आयोजन करते हुए इस सावा का महत्व समझाना और अच्छे से इसका प्रचार प्रसार करने से पुष्करणा सावा विश्व पटल पर छा गया इससे बीकानेर शहर और सावा संस्कृति का गौरव बढ़ा है । इसका श्रेय रमक झमक को है।ये उदगार रमक झमक परिसर में आयोजित सावा महिला सम्मेलन में सेवा निवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका डॉ सुदेश शर्मा ने व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि रमक झमक ने इसमें हर जाति समाज को साथ लिया और जोड़ा है इसलिए हर व्यक्ति को अपना ही सावा लगता है।
एडवोकेट तुलछा शर्मा ने कहा कि शहर के हर क्षेत्र से हर समाज की महिलाओं को इस मंच पर लाकर सावा पर चर्चा करने एवं सावा की जानकारी देने से शहर की इस खूबसूरत एवं अनूठी संस्कृति को बनाए रखने में यह प्रयास बहुत अच्छा है।
कामिनी भोजक ने कहा कि बीकानेर की हम सब महिला को गर्व महसूस होगा जब हमें अन्य शहर के लोग सावा के बारे में पूछेंगे तो हम उन्हें अच्छे से अब बता पाएंगे ।
डिंपल सोनी ने कहा कि सावा पर जब कोई उन्हें पूछता तो हमें अच्छा महसूस होता है।
संगीता शर्मा ने कहा कि सावा पर दूल्हों को दौड़ते हुए आना और सम्मान लेना,वो दृश्य देखना रोमांचित कर देता है ।श्रीमती प्रेम राजपुत ने कहा कि सब दूल्हों का एक ही नाम और सब दुल्हनों का भी एक नाम होगा यह बहुत खाश है।

रूपम आचार्य ने कहा कि रस्मों की महिलाएं मूल परम्परा को बचा कर सस्कृति को बचा सकती है ।
बबीता सेवग ने कहा कि महिलाओ की जिम्मेदारी अधिक है हमें इसमें योगदान के लिए जोड़ने का प्रयास करें।
रिंकू ओझा ने कहा कि पूरी दुनियां की नजर पुष्करणा समाज के सावा ऑलम्पिक पर है ,इसलिये हमारा दायित्व और अधिक बढ़ जाता है कि हम सावा में हर वो काम करें जिससे दुनियां इस सावा से सीख ले ।
अनुराधा आचार्य एवं अर्चना शर्मा पांडे ने कहा कि इसी संस्था हर समाज में बने जो संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करे।
सम्मेलन में लक्ष्मी ओझा, सुनीता शर्मा,इंदु वर्मा,पुष्पा शर्मा,बबीता शर्मा, रामप्यारी चुरा,भवरी छंगाणी एवं प्रो.रजनी हर्ष आदि ने विचार रखे। समारोह में वयोवृद्ध  रामकवरी ओझा ने सभी से सावा में ही शादी करने की अपील की सौर आगंतुकों कुछ रस्म रिवाज के बारे में बताया।

सावा सम्मेलन में रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘ भैरूं ‘ ने कहा कि सावा की हर रस्म विज्ञान सम्मत है ओझा ने इसे संरक्षित रखने हेतु महिलाओं से अपील की ।

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