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बीकानेर,राजकीय डूंगर महाविद्यालय के रसायन विज्ञान कॉन्फ्रेंस हॉल में आज अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) पर राजस्थान इकाई एवं आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा, राजस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “एआईएसएचई पोर्टल जागरूकता, अभ्यास एवं सुधारात्मक कार्रवाई” रहा।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्राचार्य प्रोफेसर आर. के. पुरोहित, डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, प्रोफेसर पुष्पेंद्र सिंह (सहायक निदेशक, महाविद्यालय शिक्षा, बीकानेर संभाग) एवं प्रोफेसर अजय नागर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर आर. के. पुरोहित ने उच्च शिक्षा संस्थानों के सर्वांगीण विकास हेतु डेटा संग्रहण एवं उसकी प्रभावी प्रस्तुति के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने राजकीय डूंगर महाविद्यालय की गौरवशाली विरासत एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण की सराहना करते हुए शिक्षण गुणवत्ता में निरंतर सुधार पर बल दिया। प्रोफेसर पुष्पेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों द्वारा सामना की जाने वाली विभिन्न समस्याओं एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर “एआईएसएचई पोर्टल जागरूकता, अभ्यास एवं सुधारात्मक कार्रवाई” नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। लगभग 180 पृष्ठों की इस पुस्तक में एआईएसएचई पोर्टल की पंजीकरण प्रक्रिया, विभिन्न प्रपत्रों, कार्यप्रणालियों तथा संबंधित समस्याओं के समाधान का विस्तृत वर्णन किया गया है।

कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रोफेसर अजय नागर ने “उच्च शिक्षा सर्वेक्षण में संवेदीकरण, अभ्यास एवं सकारात्मक समाधान” विषय पर व्याख्यान दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रोफेसर नरेंद्र भोजक ने “भारतीय ज्ञान परंपरा एवं नई शिक्षा नीति” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। तृतीय तकनीकी सत्र में प्रोफेसर अनु कुमार शर्मा ने महाविद्यालयों में आने वाली पोर्टल संबंधी समस्याओं एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की।

समापन सत्र में प्राचार्य प्रोफेसर राजेंद्र कुमार पुरोहित ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यक्रम में प्रोफेसर हनुमान देवड़ा (महारानी सुदर्शन कॉलेज), अनुराधा छंगाणी (मुरलीधर व्यास कन्या महाविद्यालय) एवं दीपाली व्यास (राजकीय महाविद्यालय, कोलायत) ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं में प्रोफेसर हेमेंद्र भंडारी, प्रोफेसर ओमप्रकाश स्वामी एवं महेंद्र थोरी का विशेष योगदान रहा।

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