








बीकानेर,केवाईसी (अपने रसायनों को जानें) और सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु और विस्फोटक) खतरे। उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रयोगशाला सुरक्षा एवं संरक्षा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन आज कुलपति हॉल, रसायन विभाग, सरकारी डूंगर कॉलेज, बीकानेर द्वारा राष्ट्रीय रासायनिक सुरक्षा एवं संरक्षा संघ के सहयोग से किया गया। इसका शुभारंभ रसायन विभाग में राष्ट्रीय रासायनिक सुरक्षा संघ (NACS) के अध्यक्ष प्रो. वी.के. जैन, पूर्व निदेशक, स्कूल ऑफ केमिकल एंड फार्मास्युटिकल साइंसेज, गुजरात विश्वविद्यालय; राष्ट्रीय रासायनिक सुरक्षा संघ (NACS) के सचिव प्रो. वेद प्रकाश सिंह, औद्योगिक रसायन विभाग, मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल; प्रो. आर.के. पुरोहित, अध्यक्ष आईएसआरबी, प्रचार्य एवं संरक्षक; प्रो. रमा गुप्ता, पूर्व विभागाध्यक्ष रसायन विज्ञान; प्रो. नरेंद्र भोजक, विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला के निदेशक द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. सुरेश कुमार वर्मा ने किया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. राजा राम ने स्वागत भाषण दिया और समन्वयक डॉ. उमा राठौर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर वी.के. जैन ने कुछ रोचक रसायनों जैसे नेल पेंट में प्रयुक्त एसीटोन और टीएनटी जैसे विस्फोटक रसायनों के उदाहरण देते हुए रसायनों के सुरक्षित और संरक्षित उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने केवाईसी (अपने रसायनों को जानें) के बारे में भी जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर वेद प्रकाश सिंह ने महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में रासायनिक प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में उत्तर पूर्वी भारत पर विशेष जोर दिया। प्रधानाचार्य प्रोफेसर आर.के. पुरोहित ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सीबीआरएनई से संबंधित खतरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आजकल स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीबीआरएनई को शामिल करना महत्वपूर्ण हो गया है।
पहले तकनीकी सत्र में डॉ. एच. एस. भंडारी मुख्य वक्ता थे। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रयोगशाला उपकरणों की सुरक्षा और रखरखाव के महत्व को समझाया, साथ ही दैनिक उपयोग में आने वाले प्रयोगशाला उपकरणों के बारे में भी बताया। उन्होंने वजन मशीनों, पीएच मीटर, चालकतामापी, स्पेक्ट्रोफोटोमीटर और अन्य उपकरणों में अंशांकन की भूमिका भी स्पष्ट की। यह सत्र बहुत ही संवादात्मक था और इसकी अध्यक्षता प्रो. रमा गुप्ता और प्रो. अभिलाषा सोनल ने की।
दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. एस.एन. जटोलिया ने ज्वलनशील रसायनों, विस्फोटक रसायनों, परमाणु और विकिरण प्रतीकों के उदाहरणों के साथ रसायन विज्ञान प्रयोगशालाओं में सुरक्षा प्रतीकों की भूमिका और महत्व को समझाया। उन्होंने प्रयोगशाला में रसायनों के भंडारण और स्थान निर्धारण के बारे में भी बताया। सत्र का संचालन और अध्यक्षता डॉ. एस.के. यादव और डॉ. मधुसूदन शर्मा ने की।
तीसरे तकनीकी सत्र में डॉ. राजाराम और डॉ. उमा राठौर ने सामग्री सुरक्षा डेटा शीट तैयार करने की विधि समझाई।
कार्यशाला में 100 से अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं ने पंजीकरण कराया और व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं सुरक्षा परियोजना कार्यों के लिए यह कार्यशाला कल भी जारी रहेगी।
