













बीकानेर,जयपुर रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर में कामदा एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और बाबा के दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं। “हारे के सहारे, बाबा श्याम हमारे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस विशेष अवसर पर मंदिर को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया। दिल्ली से मंगाए गए ताजे, रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने हर भक्त का मन मोह लिया। फूलों की महक और मधुर भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर बाबा के दर्शन करते नजर आए। कई भक्तों की आंखों में श्रद्धा और आस्था के भाव स्पष्ट झलक रहे थे।
कामदा एकादशी के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने बाबा को गुलाब इत्र अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थनाएं कीं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद बाबा अवश्य पूरी करते हैं, यही कारण है कि दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं।
मंदिर प्रशासन ने इस पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुव्यवस्थित कतार व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्य पुजारी एवं मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई।
इसी दौरान आगामी हनुमान जन्मोत्सव को ध्यान में रखते हुए मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
मंदिर परिसर में इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सराहनीय पहल की गई। पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हुए घोंसले लगाए गए हैं, वहीं गर्मी को देखते हुए मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर पेड़ों पर लटकाया गया ताकि पक्षियों को पानी पीकर राहत मिल सके। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी के कैंपर की भी समुचित व्यवस्था की गई, जिससे बढ़ती गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।
कामदा एकादशी के इस पावन अवसर पर खाटू श्याम मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य श्रृंगार, सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं और पर्यावरण संरक्षण की पहल ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यह दिन श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत प्रतीक बनकर सभी के दिलों में बस गया।
