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बीकानेर,मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं काम के अधिकार का विचार है। हम इसे मिटने नहीं देंगे। इस ध्येय से राष्ट्रीय कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू किया। पूरे देश में नीचे ऊपर तक कांग्रेस इस अभियान में जुटी रही। कांग्रेस से राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रतिपक्ष नेता, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष से लेकर हर कांग्रेसी नेता इस अभियान में भाजपा के भारत-जीरामजी’ योजना को मनरेगा से मात देने के लिए पूरी ताकत से लगे रहे। बीकानेर देहात अध्यक्ष बिशना राम तो इस आन्दोलन के रंग में ऐसे रंगे कि खुद और अपनी गाड़ी का रंग भी आन्दोलन में तब्दील कर दिया। हुआ क्या ? भाजपा ने पलटवार किया। कांग्रेस के विरोध के जवाब में जनता से कहा कि ‘विकसित भारत-जीरामजी योजना’, सिर्फ रोजग़ार का वादा नहीं, यह स्थायी आजीविका की गारंटी है। प्रिंट मीडिया, डिजिटल मीडिया, टीवी चैनल और मंचों से इतना प्रचार किया कि इस प्रचार युध्द में कांग्रेस की आवाज फीकी पड़ गई। वाकयदा भाजपा ने कांग्रेस को जवाब देने के लिए प्रभारी नियुक्त किए। मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी के पूरे काडर को जवाब के लिए झौंक दिया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल से लेकर पूरा तंत्र अन्य सभी मंत्री केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गजेन्द्र सिंह शेखावत राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा बीकानेर के जिला प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने ‘विकसित भारत-जीरामजी योजना’ से ग्रामीण जीवन में बड़े बदलाव के दावैं किए। यह भी कहा कि ‘विकसित भारत-जीरामजी योजना’, सिर्फ रोजग़ार का वादा नहीं, यह स्थायी आजीविका की गारंटी है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत की नींव मजबूत करेगी।
केन्द्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी करने और इसमें किए गए बदलावों के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी आंदोलन में तर्क दिया कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार नाम बदलकर और नियमों में बदलाव कर इस ऐतिहासिक योजना को कमजोर करना चाहती है।
मनरेगा और वीबी जी राम जी के बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच यह प्रचार युध्द दोनों राजनीतिक दलों के साम्मर्थ्य का आकलन बताती है। भाजपा सरकार कांग्रेस को हर मुद्दे पर कैसे घेरकर मात दे रही है। इस विरोध के बीच बीकानेर देहात कांग्रेस ने जिले में भाजपा को मात दी है। गांव-गांव, गली गली विरोध पहुंचा है। सड़कों पर भी प्रतीकात्मक रूप से मनरेगा बचाओं संग्राम की गाड़ी संदेश दे रही है। भाजपा के पास इस विरोध का काट नहीं है। भाजपा के देहात और शहर जिलाध्यक्ष कांग्रेस के विरोध के सामने कमजोर दिखाई दे रहे हैं। परिणाम पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव में सामने आ सकता है।

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