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बीकानेर,गंगाशहर तेरापंथी सभा के परामर्शक और विख्यात भामाशाह सुरेंद्र सिंह चोपड़ा की स्मृति सभा का आयोजन रविवार को मुनि श्री अमृत कुमार जी के पावन सान्निध्य में बोथरा भवन में किया गया। उल्लेखनीय है कि श्री चोपड़ा का देहावसान 10 अप्रैल को कोलकाता में हो गया था। उनके निधन से पूरे जैन समाज और गंगाशहर क्षेत्र में शोक की लहर है।

साधु-साध्वियों की सेवा का 75 वर्षों का गौरवमयी इतिहास
स्मृति सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अमृत कुमार जी ने कहा कि चोपड़ा परिवार का गंगाशहर के विकास और तेरापंथ धर्म संघ की सेवा में योगदान अविस्मरणीय है। मुनिश्री ने दान की व्याख्या करते हुए कहा, “शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में पिछले 75 वर्षों से साधु-साध्वियों का प्रवास हो रहा है। इतने वर्षों तक ‘शैय्यातर’ (आवास दान) का लाभ लेना अपने आप में एक इतिहास है।” उन्होंने चोपड़ा परिवार को ‘पितामह परिवार’ बताते हुए कहा कि इस परिवार ने न केवल गंगाशहर बसाने में मदद की, बल्कि हज़ारों लोगों को रोजगार भी प्रदान किया।
मुनिश्री ने कहा कि वह व्यक्ति धन्य होता है जो दिए हुए उपकार को मानता है।  तेरापंथी सभा यह उपकार मानती है।  उन्होंने कहा चोपड़ा परिवार पितामह परिवार है इन्होंने गंगाशहर बसाने में भी योगदान दिया है और गंगाशहर निवासियों को रोजगार मूलक सुविधा भी प्रदान की।
मुनिश्री ने कहा  धन की  तीन गति होती है दान, भोग या नाश । चोपड़ा परिवार उदार परिवार है। उन्होंने दान में धन का उपयोग किया। गंगाशहर तेरापंथ धर्म संघ  साधना का क्षेत्र है। चोपड़ा परिवार ने समाज सेवा के साथ संघ सेवा में भी बहुत योगदान दिया।

करोड़ों की संपत्ति समाज को समर्पित
गंगाशहर तेरापंथ न्यास के ट्रस्टी जैन लूणकरण छाजेड़ ने बताया कि सुरेंद्र सिंह जी चोपड़ा का  93 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया।  उन्होंने अपनी करोड़ों की लागत से निर्मित ‘शांतिनिकेतन’ भवन को नि:स्वार्थ भाव से तेरापंथी सभा को दान कर दिया। इतना बड़ा दान गंगाशहर के इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने आगे कहा कि चोपड़ा परिवार ने ही गंगाशहर में पोस्ट ऑफिस, पुलिस थाना और अस्पताल के लिए जमीन व भवन उपलब्ध करवाए थे। छाजेड़ ने कहा कि गंगासिंह जी के दरबार में उनकी अलग पहचान व पहुँच थी। गंगाशहर के तेरापंथ भवन की भूमि में फुसराज जी चोपड़ा परिवार का योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में  कनक चोपड़ा ने सरकारी चोपड़ा स्कूल में अपने चोपड़ा परिवार के सहयोग से जीर्णोद्धार करवाकर इस क्षेत्र का श्रेष्ठ सरकारी स्कूल बना दिया है।  छाजेड़ ने कहा कि सुरेन्द्रसिंह जी तेरापंथ भवन के आजीवन ट्रस्टी रहे तथा तेरापंथी सभा के परामर्शक रहे. उनकी आत्मा की उत्तरोत्तर चरम लक्ष्य को प्राप्त करने की मंगलकामनाएं व्यक्त की।

दिवंगत भामाशाह सुरेंद्र सिंह चोपड़ा की स्मृति सभा के दौरान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ साझा किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया। तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष अमर चंद सोनी ने अपने संबोधन में चोपड़ा परिवार की पिछली पीढ़ियों के अटूट समर्पण का उल्लेख किया।

सेठ ईश्वरचंद चोपड़ा के प्रयासों का उल्लेख

अमर चंद सोनी ने विशेष रूप से आचार्य श्री कालूगणी (तेरापंथ धर्मसंघ के आठवें आचार्य) के उस कठिन समय का स्मरण किया जब उनका स्वास्थ्य खराब था। उन्होंने बताया कि उस दौर में सेठ ईश्वरचंद जी चोपड़ा ने आचार्य श्री के उपचार और सेवा के लिए जो अथक प्रयास किए थे, वे आज भी समाज के लिए एक मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि यह परिवार केवल धन से ही नहीं, बल्कि अपनी सक्रिय सेवाओं और समर्पण से भी संघ के प्रति निष्ठावान रहा है।

नई पीढ़ी को संदेश
सोनी ने इस ऐतिहासिक संदर्भ के माध्यम से वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करते हुए कहा “हमें अपनी पूर्व पीढ़ी के इन महान कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिस प्रकार सेठ ईश्वरचंद जी और अब सुरेंद्र सिंह जी ने संघ और समाज की सेवा को अपना धर्म माना, उसी पदचिन्हों पर चलते हुए नई पीढ़ी के सदस्यों को भी समाज सेवा और संघ सेवा में अपना निरंतर योगदान देते रहना चाहिए।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि चोपड़ा परिवार की यह सेवा भावना ही है जिसने गंगाशहर में तेरापंथ धर्मसंघ की जड़ों को इतना गहरा और मजबूत बनाया है। यह गौरवशाली इतिहास ही युवाओं के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने कहा कि गंगाशहर में शिक्षा के क्षेत्र में चोपड़ा स्कूल उनके परिवार की अनुपम भेंट है जो बीकानेर गंगाशहर के लोग युगों युगों तक याद रखेंगे। चोपड़ा परिवार से कनक चोपड़ा ने आचार्य श्री महाश्रमण जी के सन्देश का वाचन किया।
इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की संजू लालाणी, तेयुप के रोशन नाहटा और धर्मेंद्र डाकलिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन सभा मंत्री जतनलाल संचेती ने किया। उपस्थित जनसमूह ने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके मोक्ष मार्ग की मंगल कामना की।

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