











बीकानेर,पुष्कर(अजमेर)।राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की “हमारा विद्यालय – हमारा तीर्थ” विषय को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला पवित्र तीर्थराज पुष्कर में अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुई । इसमें राजस्थान के 41 जिलों से आए शिक्षकों ने प्रतिनिधित्व किया और शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक-विद्यार्थी संबंध, नैतिक मूल्यों तथा विद्यालय को संस्कृति के केंद्र के रूप में विकसित करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की। प्रत्येक विद्यालय एक “तीर्थ” समान अनुभूति कराए,ऐसी पवित्रता और समर्पण भावना से युक्त कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों को केवल शिक्षण संस्थान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक जागरूकता के केंद्र के रूप में स्थापित करना रहा।देश की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले पुष्कर में यह आयोजन शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुआ।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रातःकालीन सत्र में वैदिक मंत्रोच्चारण और पुष्कर सरोवर की पावन वेला में प्रार्थना के साथ हुआ।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता ने 21वीं सदी के विद्यार्थी कौशल चुनौतियां और समाधान विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि विद्यालय से ही राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।हमारा विद्यालय—हमारा तीर्थ अभियान को सफल बनाने हेतु हमारे शिक्षक नई पीढ़ी में संस्कार, आत्मविश्वास, सामाजिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को विकसित करने के साथ ही सभी विद्यालयों को ज्ञान, अनुशासन और आदर्शों की प्रयोगशालाओं के रूप में विकसित करें।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर ने संगठन की भूमिका, शिक्षक शक्ति के समन्वय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के सर्वाधिक सम्मानित स्तंभों में से एक हैं और यदि शिक्षक संगठित हों तो शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन, समुदाय के सहयोग और तकनीकी हस्तक्षेप के महत्त्व को भी रेखांकित किया।
संगठन के क्षेत्र प्रमुख और संरक्षण मंडल के उमराव लाल वर्मा ने कहा कि शिक्षक समाज का वास्तविक दिशा-दर्शक है और विद्यालय की गरिमा तभी बढ़ती है जब शिक्षक अपनी भूमिका को राष्ट्रधर्म के रूप में स्वीकार करते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह विद्यालय को तीर्थ बनाने के प्रकल्पों पर चर्चा में कहा कि विद्यालय की पवित्रता और उसकी आत्मा शिक्षक के चरित्र, व्यवहार और शिक्षण की निर्मलता में निहित होती है। उन्होंने शिक्षकों से अपील करते हुए आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों के मन में समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यभाव जागृत करें।
कार्यशाला में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा और प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार लखारा ने संघ की गतिविधियों, शिक्षकों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए जारी विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए समर्पित रहा है और भविष्य में भी यह प्रतिबद्धता बनी रहेगी। उन्होंने “हमारा विद्यालय – हमारा तीर्थ” अभियान को जिला स्तर पर गति देने की बात भी की।
संगठन के प्रदेश सभाध्यक्ष सम्पत सिंह,बसंत जिन्दल,रवि आचार्य,अमरजीत सिंह,भंवर सिंह राठौड़,दिनेश शर्मा,गीता जेलिया,योगेश शर्मा और अभय सिंह, संदीप शर्मा सहित कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी कार्यशाला मे अपने-अपने विचार रखते हुए बताया कि किस प्रकार विद्यालयों को सांस्कृतिक मूल्यों, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और छात्र प्रेरणा कार्यक्रमों के माध्यम से उत्कृष्ट बनाया जा सकता है।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और जिलावार समूहों में विद्यालयों के बेहतर प्रबंधन, स्थानीय चुनौतियों और शिक्षा में नवाचार को लेकर योजनाएँ तैयार कीं। शिक्षकों ने विद्यालय में प्रार्थना व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, अनुशासन और अभिभावक सहभागिता जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।विद्यालयों में “तीर्थ” जैसी पवित्रता तभी संभव है जब शिक्षक स्वयं अपने जीवन में अनुशासन, स्वावलंबन और सकारात्मकता की जीवनशैली अपनाएँ।
संगठन द्वारा आगामी महीनों में जिला एवं उपशाखा स्तर पर इस अभियान से संबंधित छोटे-छोटे प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएँगे, जिससे अधिकाधिक शिक्षकों तक अभियान का संदेश पहुँच सके।विद्यालयों में संस्कार-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षक संघ राष्ट्रीय की ओर से विशेष सामग्री,पुस्तिकाएँ और प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएँगे।
कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षकों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों का सर्वांगीण विकास करते हुए “हमारा विद्यालय – हमारा तीर्थ” अभियान को जन-जन तक पहुँचाएँगे।शिक्षकों की ऊर्जा और शिक्षा के प्रति समर्पण भाव ने इस कार्यशाला को एक ऐतिहासिक रूप दिया। इससे राज्य भर में शिक्षा सुधार, विद्यालय सशक्तिकरण और नैतिक मूल्यों के संवर्धन की एक नई राह भी तैयार हुई है।
