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बीकानेर,बामनवाली। समीपवर्ती ग्राम बामनवाली में पिछले सात दिनों से चल रही आध्यात्मिक अमृत वर्षा का आज भव्य समापन हुआ। बालसंत भोले बाबा के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही संगीतमय कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।

भक्ति के सागर में डूबे श्रद्धालु
कथा के अंतिम दिन बामनवाली और आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। पंडाल छोटा पड़ गया और जिधर भी नज़र गई, केवल श्रद्धालु ही नजर आ रहे थे। महिलाओं और बुजुर्गों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को एक विशाल धार्मिक उत्सव में बदल दिया।

मुख्य आकर्षण एवं प्रवचन
बालसंत भोले बाबा ने अपने प्रवचनों में जीवन की सार्थकता, भक्ति और मानवता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कथा के दौरान भजनों पर झूमते श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समापन अवसर पर विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हज़ारों दीपकों की लौ के साथ श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की।

व्यवस्था एवं भंडारा
स्व खेताराम जी व स्व गोमतीदेवी सारस्वा की स्मृति मे उनके पुत्रों तोलाराम, बीरूराम व भवानीशंकर सारस्वा के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। कथा की पूर्णाहूति के बाद विशाल भंडारे (प्रसाद) का आयोजन हुआ, जिसमें हज़ारों लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।

ईको भारत के संस्थापक व मुख्य आयोजक सम्पत सारस्वत बामनवाली ने बताया कि “इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता और सकारात्मकता का संचार होता है। बालसंत भोले बाबा जी (हरिद्वार) के विचारों ने ग्रामीणों को नई प्रेरणा दी है।”

प्रभात फेरी रही चर्चा का विषय
सातों दिनों तक प्रभात फेरी गांव की हर गली मोहल्ले मे घुमी जिस वजह सब जगह साफ सफाई व गलियों को सजाया गया जिससे पूरे गाँव मे रौनक रही वहीं हर शाम नानी बाई के मायरे का व्याख्यान संत विद्यासागर जी महाराज द्वारा सुनाया गया.

युवा टीम का रहा विशेष सहयोग
परशुराम युवा फोर्स की पुरी टीम ने सैंकङो की संख्या मे इस आयोजन को सफल बनाने मे मेहनत की.

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