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बीकानेर,बीकानेर के समाजसेवी ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया ने एक और एतिहाशिक रिकॉर्ड अपने ओर अपनी टीम के नाम कर लिया। प्रत्येक रविवार से अब कहीं भी रक्त दान शिविर लगेंगे तो वहां लिखा जावेगा। रक्त समर्पण शिविर तथा रक्त दाता को कहा जावेगा रक्त सेवक।

टीम सावधान इण्डिया 077 के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश सिंह भदौरिया के यूँ तो अनगिनत उपलब्धियां उनके खाते में मिलेगी।
समाज सेवा, जन हित, पर्यावरण संरक्षण सहित सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को हॉस्पिटल आदि तक पहुंचाने के रिकॉर्ड या आज जो नारा लगाया जाता है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ टीम सावधान इण्डिया077 के कार्यकर्ताओ द्वारा आज से 26साल पहले ही ऐसे नारों की लिखी टी शर्ट पहने घूमते नजर आते थे, समाजसेवी भदौरिया तो 18वर्ष की उम्र से ही रक्तदान करने लगे थे, आज मात्र 57वर्ष की उम्र में स्वयं भदौरिया128 बार रक्त दान कर चुके हैं, जी हां यह भी ज्ञात हो भदौरिया ने अब तक अपनी प्रेरणा और प्रयासों से केवल बीकानेर, राजस्थान ही नहीं देश के अन्य कई प्रान्तों में घूम घूम कर अब तक 700से अधिक शिविरों के माध्यम से 11,000ग्यारह हजार से अधिक युवाओं को प्रेरित कर रक्तदान करवा चुके हैं, भदौरिया के संकल्प का ही परिणाम है कि उनकी टीम,
गुमशुदा तलाश केंद्र इण्डिया077 तथा बचपन बचाओ टास्क फोर्स,, और सावधान इण्डिया077के तमाम सहयोगी कार्यकर्ताओं की मदद से सम्पूर्ण भारत वर्ष मैं फेले नेटवर्क और अपने 80 से अधिक जिलों में सक्रिय कार्यालयों के माध्यम से 38साल के सेवा काल में 5700 पांच हजार सात सौ से अधिक लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाने का रिकॉर्ड भी ठाकुर भदौरिया के नाम है ,
आज टीम को एक बड़ी सफलता यह मिली कि कोरोना काल में एक रक्त दान शिविर के दौरान अपने उदबोधन के दौरान भदौरिया ने एक पीड़ा जाहिर करते हुए कहा था कि ये जो शब्द रक्त दान का हम प्रयोग करते हैं वो कुछ अजीब ओर अहंकार जैसी भाषा को दर्शता है भला मेरी क्या ओकात की मैं कोई दान कर सकूं रक्त तो ईश्वर प्रदत्त व्यस्था है, ओर हम जिस जरूरत मंद को रक्त दे रहे हैं, वो भी इंसान कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में बतौर इंसानियत हमारा संबंधी ही है, जब हम रक्त प्रदान कर देते हैं उसके बाद रक्त प्राप्त करने वाले को कहा जाता है कि फला दान दाता ने आपको रक्त दान किया जिससे आपका जीवन बचा क्या दान शब्द सुनकर उस जरूरत मंद इंसान को कुछ असहजता सी महसूस नही होती होगी अतः उस विशाल शिविर में उसी दिन ठाकुर भदौरिया ने रक्त कोष प्रभारी, रक्त दाताओं, चिकित्सकों, आयोजन कर्ताओं से एक करतबद्ध प्रार्थना की कि आज ओर अभी से अब कोई रक्त किसी को देता है तो संसार की सर्वश्रेष्ठ सेवा रक्त दान को, रक्त सेवा,नाम से संबोधित करेंगे ये एक अभियान चलाया जावे की अब रक्त दान शब्द को हटाकर रक्त प्रदान, या रक्त सेवा, रक्त समर्पण शिविर, लिख कर सम्बोधित स किया जावे और ठाकुर भदौरिया की उस समय की गई अपील का ही परिणाम है कि आज पीबीएम अस्पताल के रक्त कोष प्रांगण में एक रक्त शिविर का आयोजन किया जा रहा है उसके आयोजको द्वारा शिविर को रक्त सेवा शिविर नाम से संबोधित किया जा रहा है, साथ ही रक्त दाता शब्द को बदल कर रक्त सेवक नाम लिखा जा रहा है आज गांधी जयंती के अवसर पर टीम सावधान इण्डिया 077 के ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया ने ये ऐतिहासिक परिवर्तन का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

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