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बीकानेर,जयपुर,प्रदेशभर में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चयनित विद्यार्थियों के प्रवेश को लेकर अभिभावकों को लगातार गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन और निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी, पोर्टल संबंधी तकनीकी खामियां, दस्तावेज सत्यापन में अनावश्यक आपत्तियां तथा प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण 80 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद हजारों अभिभावक मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।

संयुक्त अभिभावक संघ ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार, शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए मांग की है कि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को समयबद्ध तरीके से प्रवेश दिलाकर शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

संघ ने बताया कि 12 मार्च को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा 6 लाख से अधिक आवेदनों की लॉटरी निकालकर लगभग 2.40 लाख विद्यार्थियों का निजी विद्यालयों में चयन किया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि करीब 1.80 लाख से अधिक विद्यार्थियों को अब तक न तो प्रवेश मिला है और न ही उनकी शिक्षा शुरू हो सकी है।

*संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि* आरटीई का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है, लेकिन वर्तमान में अनेक निजी विद्यालय चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं। कहीं अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग की जा रही है तो कहीं सीटें पूर्ण होने का बहाना बनाकर अभिभावकों को बार-बार स्कूलों एवं शिक्षा विभाग के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद कई विद्यालय खुलेआम नियमों की अवहेलना कर रहे हैं और स्थानीय शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं किए जाने से अभिभावकों में भारी आक्रोश एवं असंतोष का वातावरण है।

*प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि* —“आरटीई गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि शिक्षा का संवैधानिक अधिकार है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि चयन होने के बाद भी अभिभावकों को अपने बच्चों के प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने समय रहते सख्ती नहीं दिखाई तो हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। निजी विद्यालयों को यह समझना होगा कि वे केवल शिक्षा का व्यवसाय नहीं चला रहे, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।”

संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बनाया जाए ताकि किसी भी चयनित विद्यार्थी का शिक्षा का अधिकार प्रभावित न हो।

*1 जून को जिला कलेक्टर संदेश नायक को सौंपेंगे ज्ञापन*

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक अभिभावक दिवस के अवसर पर सोमवार, 1 जून को जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक से मुलाकात कर आरटीई प्रवेश प्रक्रिया में आ रही समस्याओं के समाधान हेतु ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहेंगे तथा वे बच्चे भी शामिल होंगे जिनका चयन होने के बावजूद अब तक प्रवेश नहीं हो पाया है।

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