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बीकानेर,लोकतांत्रिक राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन भाषा की मर्यादा और गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए इस प्रकार की अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि राजस्थान की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अनादर है।

हनुमान बेनीवाल जी, आप भी जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और भजनलाल जी शर्मा भी जनता के विश्वास से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। वे चुने हुए विधायकों द्वारा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। साथ ही प्रदेश का पूरा मंत्रिमंडल भी जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों से मिलकर बना है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के विश्वास का प्रतीक है। इसलिए इस प्रकार की बयानबाजी आपको कतई शोभा नहीं देती। यह आपकी राजनीतिक निराशा को दर्शाता है।

साथ ही मंत्रिमंडल के एक सदस्य के लिए “दलाल” जैसे शब्दों का प्रयोग करना आपकी राजनीतिक मर्यादाओं के प्रति असम्मान को दर्शाता है। लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन अभद्र भाषा किसी भी जनप्रतिनिधि की गरिमा के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

राजनीति सेवा, संवाद और जनहित का माध्यम होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत कटाक्ष और अमर्यादित शब्दों का। राजस्थान की जनता मुद्दों पर आधारित सकारात्मक राजनीति चाहती है और ऐसे स्तरहीन बयानों को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

बिहारीलाल बिश्नोई भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजस्थान
पूर्व विधायक नोखा

 

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