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बीकानेर,राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ के न्यायाधीश Mahendar Kumar Goyal द्वारा और संविदा को बड़ी राहत दी । कर्मचारियों की और से पैरवी एडवोकेट वीरेंद्र आचार्य कि । संविदा कर्मियों के अध्यक्ष आवेश हसन ने बताया कि संविदाकर्मियों के हित में महत्वपूर्ण आदेश जारी होने से कर्मचारियों में खुशी व उत्साह का माहौल है। यह मामला बीकानेर के राजकीय SDM District Hospital Bikaner में कार्यरत लगभग 20 संविदाकर्मियों से जुड़ा हुआ है।
इन कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से निजी प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को बदलने एवं सेवा व्यवस्था प्रभावित करने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी। कर्मचारियों का पक्ष रखते हुए संगठन के अध्यक्ष आवेद हसन व पदाधिकारी मनीष पुरोहित , सांवरमल ओझा, वसीम खान , शिवरतन यादव , अशोक पुरोहित , दाऊदयाल , आदी ने बताया कि सभी कर्मचारी वर्षों से अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें निजी एजेंसियों के अधीन करने का प्रयास किया जा रहा था।
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह विवाद पहले ही “Jai Prakash Ghanchi & Others Vs State of Rajasthan” मामले में तय हो चुका है, जिसमें राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा था कि सीधे कार्यरत संविदाकर्मियों को हटाकर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति करना “Grossly Illegal and Unconstitutional” अर्थात पूर्णतः अवैध और असंवैधानिक है।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने इन कर्मचारियों की सेवाएं यथावत रखने और वर्तमान याचिकाओं का भी निस्तारण करते हुए पूर्व निर्णय को लागू माना।
संगठन अध्यक्ष आवेद हसन ने कहा कि यह फैसला केवल 20 कर्मचारियों की जीत नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के संविदाकर्मियों के अधिकारों और सम्मान की जीत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार एवं संबंधित विभाग अब संविदाकर्मियों के हितों की रक्षा करेंगे तथा निजी एजेंसियों के माध्यम से शोषण की व्यवस्था पर रोक लगेगी।
कर्मचारियों एवं उनके परिजनों ने न्यायालय के फैसले का स्वागत

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