













बीकानेर,कहानी ऐसी विधा है जो सदियों से पाठकों और श्रोताओं की सर्वाधिक प्रिय विधा रही है और आज के सोशल मीडिया के दौर में भी यह सबकी प्रिय विधा बनी हुई है।’
वरिष्ठ कहानीकार और व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने सादुल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से ” युवा हिंदी कहानी और युवा कथाकार तसनीम खान” विषयक वैचारिक और कथा संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तसनीम खान की कहानियां पाठकों का मनोरंजन नहीं करती वरन मौजूदा दौर की शिनाख्त करते हुए पाठकों को बेचैन करती हैं और यथास्थिति को स्वीकार करने की बनिस्पत उन स्थितियों का साहस से मुकाबला करते हुए बदलाव का आह्वान करती हैं।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि – कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि कहानियों में चाहे जितने कलात्मक प्रयोग किये जाएँ किंतु उनमें यदि कथा-रस और कथ्य का अभाव है तो वह पाठकों की पहुंच से दूर रहेगी। उन्होंने कहा कि तसनीम खान युवा पीढ़ी के कथाकारों में इस रूप में अलग पहचान रखती हैं कि वे अनछुए विषयों को लेती हैं, शैल्पिक प्रयोग भी करती हैं, साथ ही कथ्य इतना प्रभावी होता है कि पाठक उसे शुरू करने के बाद पूरी किए बिना छोड़ नहीं सकता।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार – गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि राजस्थान के साहित्यकारों के प्रति आलोचकों का उपेक्षाभाव होने के बावजूद यहां के साहित्यकारों ने अपनी प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और प्रतिष्ठा बनाई है। नई पीढ़ी में तसनीम खान ऐसी ही कथाकार हैं जिनका पहला उपन्यास ही ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार के तहत अनुशंसित और प्रकाशित हुआ।
इस अवसर पर युवा कथाकार तसनीम खान ने अपने सद्य प्रकाशित कहानी संग्रह ‘ बवालिस्तान ‘ से चर्चित कहानी ‘अब्दुल की मौत ‘ का प्रभावी वाचन कर पाठकों को संवेदित कर दिया। तसनीम ने अपनी रचना प्रक्रिया साझा करते हुए कहा कि उनका स्वर प्रतिरोध का रहा है क्योंकि धर्म के नाम पर औरतों ने बहुत यातनाएं सही हैं और सह रही हैं। वे बदलाव चाहती हैं और बदलाव की यह बैचेनी ही उनसे लिखवाती रही है।
युवा कथाकार तसनीम खान का इस अवसर पर माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ और पुस्तकें भेंट कर अतिथियों द्वारा सम्मान किया गया।
राजकीय संग्रहालय के क्यूरेटर राकेश शर्मा वरिष्ठ अर्थशास्त्री, संपादक, व्यंग्यकार डॉ. अजय जोशी, वरिष्ठ कथाकार – गीतकार प्रमोद कुमार शर्मा, कथाकार मुकेश पोपली, कथाकार कविता मुकेश सहित अन्य उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने भी पठित कहानी पर अपने विचार रखे।
