













बीकानेर,झुंझुनूं। जिले के खुंडियां गांव स्थित पंचायत भवन में मंगलवार को भारतीय किसान संघ की ग्राम समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों के सशक्तिकरण, संगठन की रीति-नीति और आधुनिक खेती के विकल्पों पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. पवन चौधरी ने किसानों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।
नीतिबद्ध संघर्ष और जागरूकता पर जोर
डॉ. पवन चौधरी ने कहा कि भारतीय किसान संघ किसानों की जीवन रेखा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसानों को केवल जागरूक होना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग होकर नीतिबद्ध तरीके से अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब गांव का किसान आर्थिक रूप से सशक्त होगा, तभी ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास संभव है।” इस दौरान उन्होंने युवाओं को भी खेती और संगठन की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
गौ-आधारित खेती: कम लागत, अधिक मुनाफा
बैठक के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र नागर ने किसानों को रासायनिक खेती के घातक परिणामों से आगाह किया। उन्होंने ‘गौ-आधारित खेती’ को भविष्य की कृषि बताते हुए इसके अनेक फायदे गिनाए:
शून्य लागत: खाद और कीटनाशक घर पर तैयार होने से खेती का खर्च नगण्य हो जाता है।
भूमि स्वास्थ्य: केंचुओं की वृद्धि से मिट्टी भुरभुरी और अधिक उपजाऊ बनती है।
जल संरक्षण: जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की नमी सोखने की क्षमता बढ़ती है।
स्वास्थ्य और लाभ: रसायन मुक्त फसल से कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है और बाजार में उपज का बेहतर भाव मिलता है।
संगठन की शक्ति है ग्राम समिति
डॉ. चौधरी ने बताया कि ‘राष्ट्रहित में किसान हित’ संगठन का मूल मंत्र है। ग्राम समिति संगठन की सबसे मजबूत जमीनी इकाई है, जो बिजली, पानी और खाद जैसी स्थानीय समस्याओं को जिला स्तर तक पहुंचाकर उनका समाधान सुनिश्चित करती है। कार्यक्रम में अनिल पूनिया ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि एकता में ही शक्ति है और संगठित होकर ही व्यवस्था परिवर्तन संभव है।
70-80 से अधिक किसान रहे मौजूद
बैठक में सरपंच प्रतिनिधि मोहन सिंह जी, सुमेर सिंह, महावीर, भागीरथ, सत्यवीर, ताराचंद, रामनिवास, प्रताप सिंह, मूलचंद, पुनीत सिलायच, सुनील धनखड़, राजेश धनखड़, विद्याधर, दिनेश धनखड़, जसराम धनखड, निखिल पिलानिया, संजय सिलायच, मोर सिंह, उम्मेद सिलायच, सत्यवीर सिंह बलौदा, रघुवीर सिंह, रामधन सिंह सहित क्षेत्र के करीब 70-80 प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
विशेष: डॉ. पवन चौधरी के नेतृत्व में वर्तमान में जिले भर में ‘ग्राम समिति’ पुनर्गठन का अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अंतिम छोर पर खड़े किसान की आवाज को शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुँचाया जा सके।
