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बीकानेर,जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर द्वारा श्रीमती पद्मश्री चोपड़ा धर्मपत्नी सुरेन्द्र सिंह चोपड़ा का अभिनन्दन समारोह शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र में आयोजित किया गया।

साध्वीवृंद ने बताया दान का महत्व
अभिनन्दन समारोह को संबोधित करते हुए सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ने कहा कि 14 प्रकार के दान होते हैं। जिसमें भुमि का दान का बड़ा महत्व है।साधु – संतो के लिए शैयातर के  दान का लाभ का कर्म निर्जरा की दृष्टि से बहुत लाभदायक है। चोपड़ा परिवार द्वारा धर्म संघ में किये गये कार्यों का उल्लेख करते हुए साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ने कहा कि धर्म संघ की प्रभावना करने में सभी को कुछ न कुछ योगदान देते रहना चाहिए। संघ हमारे लिए त्राण है। बहिन पदमश्री चोपड़ा ने धर्म संघ की बहुत सेवा की है।
साध्वी श्री कल्पयशा जी ने कहा साध्वी श्री गंगा जी ने गंगाशहर के श्रावको पर बहुत मेहनत की थी। उन्होंने कहा था कि इन परिवारों की आने वाली पीढ़ियां धर्म संघ की बहुत सेवा करेगी। सम्पत्ति होना पुण्य का उदय योग से होता है और सम्पत्ति का दान करना बहुत बड़ा योग होता है। धरती पर यदि भगवान के दर्शन करने की इच्छा होतो सेवा केन्द्र में विराजित रत्नाधिक साध्वियों के दर्शन कर लेने से साक्षात भगवान के दर्शन करने जैसा अनुभव कर सकते हैं।रश्मि यशा जी ने मधुर गीतिका का संगान किया।

चोपड़ा परिवार: गंगाशहर के विकास का आधार स्तंभ
तेरापंथी महासभा के संरक्षक जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि गंगाशहर की स्थापना के समय सभी मूलभूत सुविधाएं सेठ भैरूदान ईशर चन्द चोपड़ा परिवार ने ही उपलब्ध करवाई चाहे पानी के कुऐ हो, चाहे स्कूल, चिकित्सा के लिए जमीन, पोस्ट आफिस, पुलिस थाने की भवन भुमि हो या शमशान भूमि (अंतिम संस्कार स्थल) हो सभी चोपड़ा परिवार ने ही जनता को उपलब्ध करवाये है। समाज के विकास के लिए तेरापंथ भवन की भूमि हो या सज्जन निवास का  भवन दोनों में चोपड़ा परिवार का महनीय सहयोग रहा  है।

छाजेड़ ने कहा कि आज इस क्रम में शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र को तेरापंथ सभा को समर्पित करना इतिहास को पुनः दोहराया गया है। उन्होंने कहा कि नियति को जो मंजूर होता है वही संभव होता है।  करोड़ों के इस भवन को समाज को वर्षों से उपयोग में दिया हुआ था तथा 2001 में विधिवत रूप से तेरापंथ सेवाकेन्द्र के रूप में  सुरेन्द्र सिंह जी चोपड़ा ने समाज को देने की घोषणा कर दी थी।  उनकी इच्छा थी शैयातर का लाभ मिले अतः मृत्यु से कुछ दिन पूर्व उन्होंने तेरापंथी सभा के नाम गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर कर दिए थे परन्तु पंजीयन का कार्य पूरा नहीं हो सका अतः उनको जीवन भर शैयातर का लाभ मिल गया।

छाजेड़ ने कहा यह भवन साध्वी सेवा केन्द्र के रूप में उपयोग आ रहा है , भवन का नाम शांतिनिकेतन व आज पंजीयन करवाने वाली पद्म श्री जी तथा कार्यक्रम का सान्निध्य प्रदान कर रही साध्वी श्री  त्रिशला कुमारी जी सभी स्त्रीलिंग है अतः  यह कहा जा सकता है कि करोड़ों के इस भवन का पंजीयन पदमश्री जी के हाथों होना नियति का एक सुखद संयोग है।
ऐतिहासिक रजिस्ट्री और सहयोग
सभा मंत्री जतन लाल संचेती ने बताया कि दानवीर स्व. सेठ ईशर चंद जी चोपड़ा के पौत्र व स्व.तोलाराम जी चोपड़ा के पुत्र  स्व. सुरेंद्र सिंह चोपड़ा ने वर्ष 2001 में ही इस भवन को सेवा केंद्र के रूप में देने की घोषणा की थी। उनकी भावना को पूर्ण करते हुए श्रीमती पद्मश्री चोपड़ा ने अब विधिवत रजिस्ट्री सभा के नाम करवा दी है। इस कार्य में बाबू मधुकर चोपड़ा, कनक जी चोपड़ा, जैन लूणकरण छाजेड़ और एडवोकेट प्रमोद कुमार चोरड़िया का विशेष सहयोग रहा।

सम्मान और कृतज्ञता

इस अवसर पर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष नवरतन बोथरा, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती प्रेम बोथरा,तेयुप अध्यक्ष ललित राखेचा, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष करणी दान रांका, आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष किशन बैद व टीपीएफ की उपाध्यक्ष  एडवोकेट विधा चोरड़िया आदि कार्यकर्ताओं ने विचार व्यक्त रखते हुए इतने बड़े विसर्जन की भूरी भरी प्रशंशा की।
 अभिनंदन पत्र वाचन
श्रीमती पदमश्री चोपड़ा के अभिनन्दन पत्र का वाचन अमरचंद सोनी ने किया। एडवोकेट प्रमोद चोरड़िया के अभिनन्दन पत्र का वाचन उपाध्यक्ष पवन छाजेड़ ने किया।

सम्मान व भेंट

इस अवसर पर तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से करोड़ों की जमीन एवं भवन तेरापंथी सभा गंगाशहर को समर्पित करने वाले श्रीमती पदमश्री चोपड़ा  परिवार का व एडवोकेट प्रमोद चोरडिया का साहित्य,पताका व अभिनन्दन पत्र भेंट कर दोनों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष गणेश जी बोथरा सहित समाज के अनेक लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सभा गंगाशहर के मंत्री जतन लाल संचेती ने किया।

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