













बीकानेर। मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा गंगाशहर स्थित सेंटर फॉर लाइफ, धरम सज्जन ट्रस्ट में पिछले बीस दिन से आयोजित की जा रही “मैपिंग कल्चर्स” शीर्षक से प्रख्यात फोटोग्राफर एलिज़ाबेथ सिम्सन (1931–2025) की फोटोग्राफी प्रदर्शनी का समापन रविवार को हुआ। प्रदर्शनी के अंतिम दिन जिला कलक्टर निशांत जैन और पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। जिला कलक्टर निशांत जैन ने प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद कहा कि एलिज़ाबेथ सिम्सन ने जिस तरह से पश्चिमी राजस्थान के वस्त्र, लोक संगीत, कारीगरी और जनजीवन को अपने कैमरे में उतारा है यह एक दुर्लभ प्रयास है। उन्होंने कहा कि उनके फोटो आज के बदलते समय में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संदर्भ प्रस्तुत करती है।
जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल अतीत की स्मृतियों को सहेजने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।
समापन अवसर पर हुआ संवाद कार्यक्रम
मलंग फोक फाउंडेशन के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि प्रदर्शनी के समापन अवसर पर राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कला मर्मज्ञ डॉ मदन मीणा द्वारा “राजस्थान की लोक संस्कृति और एलिजाबेथ सिम्सन” विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ मदन मीणा ने कहा कि एलिज़ाबेथ सिम्सन के इस काम को सिर्फ़ प्रदर्शनी तक सीमित नहीं किया जा सकता बल्कि उनके चित्रों को हम राजस्थान की वस्त्र परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए भी काम ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनके फोटो के आधार पर कोटा हेरिटेज सोसाइटी ने सौ से अधिक टेक्सटाइल प्रिंट को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। व्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए प्रो बी एल भादानी ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियाँ ना सिर्फ़ इतिहास के पन्नो को खोलती है बल्कि इसमें हमारे ग्रामीण समाज को समझने में भी मदद मिलती है.
व्याख्यान में डॉ नितिन गोयल, वनस्थली विद्या पीठ के शोधार्थी पीहू पांडे, कनक सिंह, निवेदिता, अंकिता, निशा वशिष्ठ के अलावा रितेश व्यास, सरोद वादक अमित गोस्वामी के अलावा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे. प्रदर्शनी को 700 से अधिक कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों के अलावा बड़ी संख्या में युवाओं, स्कॉलर, शोध विद्यार्थी, फोटोग्राफर और आमजन ने अवलोकन किया है.।
