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बीकानेर,मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा गंगाशहर स्थित सेंटर फॉर लाइफ, धरम सज्जन ट्रस्ट में पिछले बीस दिन से आयोजित की जा रही “मैपिंग कल्चर्स” शीर्षक से प्रख्यात फोटोग्राफर एलिज़ाबेथ सिम्सन (1931–2025) की फोटोग्राफी प्रदर्शनी का समापन रविवार को होगा। प्रदर्शनी को अब तक 700 से अधिक कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों के अलावा बड़ी संख्या में युवाओं, स्कॉलर, शोध विद्यार्थी, फोटोग्राफर और आमजन ने अवलोकन किया है.

प्रदर्शनी के अवलोकन के लिए आए दर्शकों ने प्रदर्शनी के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनी में विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के वस्त्र, लोक संगीत, कारीगरी और जनजीवन की झलक देखने को मिली, जो आज के बदलते समय में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संदर्भ प्रस्तुत करती है। यह आयोजन न केवल अतीत की स्मृतियों को सहेजने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।
बीकानेर की दिव्यांग सेवा संस्थान के बच्चों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और राजस्थान की लोक संस्कृति को प्रदर्शनी में लगे चित्रों के माध्यम से निहारा. संस्थान के मूक-बधिर बच्चों ने ना केवल प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखायी बल्कि प्रदर्शनी में रखे गए चरखे और बायोस्कोप का भी अनुभव लिया.
समापन अवसर पर होगा संवाद कार्यक्रम 

मलंग फोक फाउंडेशन के निदेशक गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि प्रदर्शनी का समापन रविवार को होगा जिसमे राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कला मर्मज्ञ डॉ मदन मीणा द्वारा “राजस्थान की लोक संस्कृति और एलिजाबेथ सिम्सन” विषय पर शाम 6 बजे व्याख्यान और संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा. डॉ मदन मीणा ने आदिवासी समुदायों पर गहन अध्ययन किया है और उनकी कलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पिछले कई सालों से सक्रिय हैं. व्याख्यान की अध्यक्षता प्रो बी एल भदानी करेंगे. प्रदर्शनी सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक खुली रहेगी.

एलिज़ाबेथ सिम्सन द्वारा पिछले कई दशकों में राजस्थान और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में किए गए यात्राओं के दौरान लिए गए ये चित्र केवल दृश्य दस्तावेज़ नहीं हैं, बल्कि समय के साथ बदलते समाज, जीवन-शैली और सांस्कृतिक परंपराओं के जीवंत साक्ष्य भी हैं। उनकी दृष्टि में ग्रामीण जीवन, लोक कलाएँ, वस्त्र परंपराएँ और मानवीय भावनाएँ एक विशेष संवेदनशीलता और गहराई के साथ उभरकर सामने आती हैं।
प्रदर्शनी में बायोस्कोप बन रहा आकर्षण का केंद्र 

मलंग फोक फाउंडेशन द्वारा प्रदर्शनी में आम जन के लिए प्राचीन समय में गांव में मनोरंजन का साधन रहे बायोस्कोप को भी प्रदर्शित किया गया है जिसमे बीकानेर की 50 साल से भी अधिक पुराने फोटो को दिखाया जा रहा है। प्रदर्शनी में आने वाला हर व्यक्ति बायोस्कोप को देखकर अपने बचपन की यादें ताजा कर रहा है।

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