













बीकानेर, वन हेल्थ एक्शन प्लान के तहत बीकानेर में पांच दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। संयुक्त निदेशक बीकानेर जोन डॉ. देवेंद्र चौधरी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुखराज साध के सानिध्य में आयोजित इस प्रशिक्षण में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पशु पालन विभाग और वन विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और लाइव स्टॉक अधिकारियों ने भाग लिया। डॉ साध ने बताया कि दिनांक 28 अप्रैल से 2 में 2026 तक यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के एनसीडीसी सीडीसी, राज्य चिकित्सा निदेशालय जयपुर और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
*मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच समन्वय पर जोर:*
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय वन हेल्थ कार्यक्रम के तहत मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ लोकेश गुप्ता ने बताया कि बढ़ती आबादी और भौगोलिक विस्तार के कारण मनुष्यों का पशु-पक्षियों के साथ संपर्क बढ़ रहा है, जिससे जानवरों से मनुष्यों में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार मनुष्यों को प्रभावित करने वाले 65 प्रतिशत से अधिक संक्रामक रोगों का मुख्य स्रोत जानवर ही हैं। वन्य जीवों में पाए जाने वाले विभिन्न वायरस भविष्य में नई बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जिसके प्रति सतर्कता और पूर्व तैयारी आवश्यक है।
*विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी:*
प्रशिक्षण के दौरान एनसीडीसी सीडीसी, नई दिल्ली से आए डॉ. संजीव, डॉ. अभिषेक, डॉ. रामकेश, डॉ. सोवन तपन, डॉ. अनु नागर, डॉ. नियात और जयपुर निदेशालय से स्टेट माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. रूचि ने तकनीकी सत्रों को संबोधित किया। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर से डॉ. आर. बी. बरार, डॉ. गौतम लुनिया, डॉ. अजयपाल और डॉ. दीपशिखर आचार्य ने भी विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की। स्थानीय स्तर पर डॉ. लोकेश गुप्ता, नीलम प्रताप सिंह राठौड़, प्रदीप कुमार चौहान, विजय सिंह तथा अमित ने प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं और समन्वय में सहयोग किया।
*प्रमुख जूनोटिक रोगों पर हुआ मंथन:*
एपिडेमियोलॉजिस्ट नीलम प्रताप सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यशाला में मनुष्यों में फैलने वाले मुख्य रोगों जैसे ब्रुसलोसिस, एंथ्रेक्स, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टाइफस, निपाह वायरस, इबोला, सार्स, मर्स, बर्ड फ्लू, रेबीज और मंकी पॉक्स के लक्षणों व बचाव के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पारिस्थितिकी और आवासों में हो रहे बदलावों के कारण जानवरों में रोगों के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों का एक मंच पर आकर कार्य करना समय की मांग है।
