













बीकानेर,सूर्य प्रकाशन मंदिर के 62वें स्थापना दिवस के अवसर पर बुधवार को हिंदी और राजस्थानी के तीन वरिष्ठ साहित्यकारों मालचंद तिवाड़ी, अनिरुद्ध उमट एवं डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’ का सम्मान किया गया। तीनों साहित्यकारों का साफा, शॉल, श्रीफल एवं माला पहनाकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. हरि शंकर आचार्य मौजूद रहे।
इस अवसर पर बुलाकी शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। इसे जन-जन तक पहुंचाने में प्रकाशकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सूर्य प्रकाश बिस्सा ने प्रकाशन के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए।
कवि कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यकारों को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाशक और साहित्यकार एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने सूर्य प्रकाश बिस्सा के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंग सांझा किए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. हरि शंकर आचार्य ने साहित्य के बदलते स्वरूप और इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज पुस्तकें खरीदकर पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है, जो कि चिंताजनक है।
गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’, नवनीत पांडे ने अनिरुद्ध उमट रवि पुरोहित ने मालचंद तिवाड़ी का परिचय प्रस्तुत किया और उनके साहित्यिक योगदान को रेखांकित किया।
तीनों सम्मानित साहित्यकारों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने साहित्यिक अनुभव साझा किए और युवा पीढ़ी को लेखन एवं पठन के लिए प्रेरित किया।
डॉ. प्रशांत बिस्सा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों एवं साहित्यकारों का अभिनंदन किया तथा सूर्य प्रकाशन मंदिर की साहित्यिक परंपरा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गौरी शंकर प्रजापत ने किया।
कार्यक्रम में कमल रंगा, डॉ. फारूक चौहान,जुगल किशोर पुरोहित, योगेंद्र पुरोहित, डॉ. नरसिंह बिन्नाणी, डॉ. अजय जोशी, अब्दुल शकूर सिसोदिया, गोविन्द जोशी, प्रियंका बिस्सा, डॉ.रमेश भोजक , संगीता व्यास,डॉ. नृसिंह बिनानी, मनीष शर्मा, पवन पारीक सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
