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बीकानेर,मानव चेतना जागृति प्रन्यास की ओर से जवाहर नगर स्थित राम मंदिर में चल रही रामचरितमानस की कथा एवं बीकानेर के बहुआयामी उत्थान के संकल्प को लेकर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के कार्यक्रम का आज समापन हुआ इस अवसर पर कथक गुरु वीणा जोशी के सानिध्य में उनकी शिष्याओं ने रामचंद्र कृपालु भजमन एवं रामचरित की चौपाइयों के ऊपर शुद्ध शास्त्री कथक नृत्य का नृत्यांजलि प्रस्तुत किया एवं राम जन्मोत्सव के साथ परांबा भगवती दुर्गा की आराधना भी कथक नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की यह नृत्य प्रस्तुत किया सुश्री वेदांशी गौतम, कार्यक्रम के अंतिम दिन में नवरात्रि में चल रहे इस उत्सव में संगीत संयोजन  नवरत्न जोशी एवं तेजस जोशी ने दिया कथा का संपूर्ण प्रबंधन  अशोक उपाध्याय एवं मूलचंद उपाध्याय एवं विजय कपूर द्वारा किया गया कथा के अंत में गोपाल उपाध्याय ने आशीर्वचन कहे और कहां की रामचरितमानस की कथा प्रत्येक घर में होनी चाहिए प्रत्येक मंदिर में होने चाहिए भगवान राम के जीवन का ज्ञान आज के समय में परिवार और समाज में नहीं होगा तो निश्चित रूप से बहुत बड़ा पतन हो जाएगा भगवान राम के चरित्र का गुणगान ही हमें विकसित कर सकता है इस अवसर पर भैरव भवानी ज्योतिष तंत्र शोध संस्थान के संस्थापक युगल नारायण जी रंगा ने नवरात्रि की महिमा एवं मां भगवती के पूजन की तांत्रिक पौराणिक एवं वैदिक विधि का संक्षिप्त वर्णन किया कथा व्यास आचार्य राजेंद्र जोशी ने कथा का उद्देश्य बताया बीकानेर के सर्वांगीण सामूहिक विकास के लिए यह आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख रूप से स्वच्छ बीकानेर प्लास्टिक मुक्त बीकानेर के लक्ष्य को लेकर यह आयोजन प्रन्यास करवा रहा है और घर-घर में हनुमान चालीसा के माध्यम से बीकानेर में हो रहे अपराध आत्महत्या एवं नशे के चंगुल में फंस रहे युवाओं को बचाना है आचार्य राजेंद्र जोशी ने सभी बेजुबान जीव जंतुओं और मुख्य रूप से धर्म स्वरूप नदी और गौ माता के सम्मानजनक जीवन हेतु समाज को एक नई राह दिखाई और बताया कि वे बीकानेर में इस विषय में वर्ष 2021 से निरंतर रहकर के संघर्ष कर रहे हैं और उनका यह संघर्ष सभी के आत्म रूपांतरण को लेकर है जब तक व्यक्ति दूसरों को दोष देता है वह कभी भी वास्तविक विकास की और अग्रसर नहीं होता सभी लोग अपने कर्तव्य और जिम्मेवारी को समझें तथा प्रशासन और समाज साथ में सामंजस्य के साथ काम करेंगे तभी शहर का और इस राष्ट्र का सच्चा निर्माण हो सकता है और इसी का नाम राम राज्य है जहां पर संघर्ष का मतलब विरोध नहीं है जहां पर संघर्ष का मतलब किसी अन्य पर दोष का ठीकरा फोड़ देना किसी और को जिम्मेवार ठहरा देना राम राज्य नहीं है

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